परिनौकायन

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सन् १५३३ में छपा एक परिनौकायन

परिनौकायन (periplus) एक ऐसे दस्तावेज़ को कहते हैं जिसमें किसी नौका के कप्तान को किसी सागर के छोर के साथ लगे हुए बंदरगाहों और तटीय स्थलाकृतियों का दूरियों के मापन के साथ वृतांत मिले। पुराने युगों में ऐसे परिनौकायनों के प्रयोग से नावी कप्तानों को नौकायन में सहायता मिलती थी। इतिहास में ऐसे कई प्रसिद्ध परिनौकायन पुस्तकें मिलती हैं।[1][2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Kish, George (1978). A Source Book in Geography. Cambridge: Harvard University Press. पृ॰ 21. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-674-82270-6.
  2. Shahar, Yuval (2004). Josephus Geographicus: The Classical Context of Geography in Josephus. Mohr Siebeck. पृ॰ 40. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 3-16-148256-5.