पतली परत क्रोमैटोग्राफी

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पतली परत क्रोमैटोग्राफी एक क्रोमैटोग्राफी की तकनीक है जो गैर वाष्पशील मिश्रण को अलग करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।[1] पतली परत क्रोमैटोग्राफी कांच, प्लास्टिक, या एल्यूमीनियम पन्नी, जो पी लेनेवाला सामग्री, आमतौर पर सिलिका जेल, एल्यूमीनियम ऑक्साइड (एल्यूमिना), या सेल्यूलोज की एक पतली परत के साथ लेपित के एक पत्रक पर किया जाता है। सोख लेनेवाला यह परत स्थिर चरण के रूप में जाना जाता है। घटकों की पहचान आये हुए स्पॉट रंग और उनके मंदता कारक के आदार पर किया जाता है।

प्लेट की तैयारी[संपादित करें]

  1. पेहले कांच की प्लेट को डिटर्जेंट से साफ कर के उसको सुखा लेना चाहए।
  2. सिलिका जेल का घोल तयार कर ले।
  3. फिर उस घोल को कांच की प्लेट पर धिरे से डाले और पूरी प्लेट पर पतली परत बना ले।
  4. प्लेट को ३० से ४० मिनिट तक रख दे और फेर उसे ओवन में सुखाए।

तकनीक[संपादित करें]

एक पतली परत क्रोमैटोग्राफी प्लेट चलाने के लिए, निम्न प्रक्रिया से बाहर किया जाता है:

काली स्याही के अलग हुए स्पॉट
  1. एक केशिका का उपयोग कर के प्लेट पर नमूने को प्लेट के नीचे के किनारे से १.५ cm ऊपर लगया जाता है।
  2. एक कांच के कक्ष में विलायक डाले और कम से कम २ cm तक हो।
  3. और उस कक्ष को कांच की प्लेट से बंद कर के ३० मिनिट तक रख दे।
  4. फिर नमूने वाली प्लेट को कक्ष में आराम से रखे और ऊपर से कांच की प्लेट से ही बंद करे।
  5. प्लेट विलायक को सोख लेता है।
  6. अलग हुए स्पॉट देखने लगते हैं।
  7. फिर उनका मंदता कारक निकला जाता है।

घटकों की पहचान आये हुए स्पॉट रंग और उनके मंदता कारक के आदार पर किया जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Harry W. Lewis & Christopher J. Moody (13 Jun 1989). Experimental Organic Chemistry: Principles and Practice (Illustrated संस्करण). WileyBlackwell. पपृ॰ 159–173. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-632-02017-1.