सामग्री पर जाएँ

नागर ब्राह्मण

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

नागर ब्राह्मण भारत के प्रमुख ब्राह्मण समुदायों में से एक हैं, जिनका ऐतिहासिक संबंध मुख्यतः गुजरात से माना जाता है। यह समुदाय अपनी विद्वत्ता, संस्कृत एवं धर्मशास्त्र के ज्ञान, प्रशासनिक दक्षता तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए प्रसिद्ध रहा है। नागर ब्राह्मणों का उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, वंशावलियों, ऐतिहासिक अभिलेखों तथा स्थानीय परंपराओं में मिलता है।

परंपरा के अनुसार नागर ब्राह्मणों का संबंध हाटकेश्वर महादेव से माना जाता है, जिन्हें इस समुदाय का कुलदेवता माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय गुजरात से निकलकर भारत के अनेक भागों में बस गया तथा शिक्षा, न्याय, प्रशासन, साहित्य, कला, व्यापार और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा।

नागर ब्राह्मणों की उत्पत्ति के संबंध में धार्मिक और ऐतिहासिक स्रोतों में विभिन्न मत मिलते हैं। जहाँ स्कन्द पुराण के नागरखण्ड में उनकी उत्पत्ति का पौराणिक वर्णन मिलता है, वहीं आधुनिक इतिहासकार उनके विकास को पश्चिम भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास से जोड़कर देखते हैं।

नागर ब्राह्मणों की उत्पत्ति और प्रारम्भिक इतिहास के संबंध में विभिन्न धार्मिक ग्रंथों, लोकपरंपराओं तथा ऐतिहासिक स्रोतों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं। इनके विषय में उल्लेख विशेष रूप से स्कन्द पुराण के नागरखण्ड में प्राप्त होता है, जहाँ नागर ब्राह्मणों की उत्पत्ति को धार्मिक परंपरा से जोड़ा गया है।[1]

कुछ इतिहासकारों के अनुसार स्कन्द पुराण का वर्तमान स्वरूप कई शताब्दियों में विकसित हुआ। इसका संकलन और संपादन विभिन्न कालों में हुआ, इसलिए इसकी रचना-तिथि को लेकर विद्वानों में मतभेद है।[2]

नागर ब्राह्मणों को परंपरागत रूप से विद्या, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, संस्कृत अध्ययन तथा धार्मिक अनुष्ठानों में दक्ष माना जाता है। अनेक क्षेत्रों में उन्होंने राजपुरोहित, विद्वान, शिक्षक तथा प्रशासकीय सलाहकार के रूप में भी कार्य किया। परंपरा के अनुसार वे धार्मिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार और वैदिक परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।[3]

लोकपरंपरा के अनुसार अनेक शासकों द्वारा नागर ब्राह्मणों को उनकी विद्वत्ता और धार्मिक सेवाओं के कारण भूमि तथा अन्य सम्मान प्रदान किए गए। गुजरात के वडनगर, विसनगर, आनंद तथा आसपास के क्षेत्रों को नागर ब्राह्मणों के प्रमुख ऐतिहासिक निवास-स्थलों में माना जाता है। समय के साथ इस समुदाय के लोग भारत के विभिन्न भागों में जाकर बस गए।[4]

नागर ब्राह्मणों की विभिन्न उपशाखाओं के नाम उनके मूल निवास-स्थानों के आधार पर विकसित हुए। उदाहरण के लिए वडनगर से वडनगरा, विसनगर से विसनगरा, प्रश्निपुर से प्रश्नोरा, कृष्णपुर से कृष्णोरा तथा शतपद से शठोदरा नाम प्रचलित हुए। इन उपशाखाओं का उल्लेख विभिन्न वंशावलियों और सामुदायिक ग्रंथों में मिलता है।[5]

स्कन्द पुराण के नागरखण्ड में वर्णित एक धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान शिव ने देवी पार्वती (उमा) के विवाह के अवसर पर नागर ब्राह्मणों की उत्पत्ति की तथा प्रसन्न होकर उन्हें हाटकेश्वर महादेव से संबंधित क्षेत्र का आशीर्वाद प्रदान किया। यह विवरण धार्मिक परंपरा का अंग है और इसे ऐतिहासिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पौराणिक मान्यता के रूप में देखा जाता है।[6]

विरासत एवं योगदान

[संपादित करें]

नागर ब्राह्मण समुदाय ने भारतीय समाज, संस्कृति तथा ज्ञान-परंपरा के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस समुदाय के अनेक विद्वानों ने संस्कृत, प्राकृत, गुजराती तथा अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य, व्याकरण, दर्शन, ज्योतिष और धर्मशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। विभिन्न कालों में नागर ब्राह्मण राजपुरोहित, प्रशासक, शिक्षक, न्यायविद् तथा राजकीय सलाहकार के रूप में भी कार्यरत रहे।

गुजरात के अनेक ऐतिहासिक नगरों तथा मंदिरों के संरक्षण, धार्मिक परंपराओं के संवर्धन और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी इस समुदाय की सक्रिय भूमिका रही है। वर्तमान समय में नागर ब्राह्मण भारत और विदेशों के अनेक देशों में निवास करते हैं तथा शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, उद्योग, चिकित्सा, न्याय, कला और साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

आज भी नागर ब्राह्मण समुदाय अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य करता है।


इन्हें भी देखें

[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ

[संपादित करें]
  1. ↑ Skanda Purana (Nagara Khanda).
  2. ↑ Rocher, Ludo (1986). The Puranas. Otto Harrassowitz.
  3. ↑ Ghurye, G. S. (1979). Caste and Race in India. Popular Prakashan.
  4. ↑ Gazetteer of the Bombay Presidency.
  5. ↑ Nagar Brahmin Genealogies.
  6. ↑ Skanda Purana (Nagara Khanda).
  • Ghurye, G. S. (1969). Caste and Race in India. Popular Prakashan. ISBN 9788171542055.
  • Skanda Purana (Nagara Khanda). Motilal Banarsidass.
  • Gazetteer of the Bombay Presidency. Government Central Press.