नरसिंहवर्मन १
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| नरसिंहवर्मन प्रथम | |
|---|---|
| वातापिकोंडन[1] महामल्लन | |
मामल्लपुरम में नरसिंहवर्मन प्रथम की प्रतिमा | |
| पल्लव सम्राट | |
| शासनावधि | ल॰ 630 – ल॰ 668 |
| पूर्ववर्ती | महेन्द्रवर्मन प्रथम |
| उत्तरवर्ती | महेन्द्रवर्मन द्वितीय |
| जन्म | कांचीपुरम, पल्लव साम्राज्य |
| निधन | 668 कांचीपुरम, पल्लव साम्राज्य |
| जीवनसंगी | अनाम पांड्य राजकुमारी |
| संतान | महेन्द्रवर्मन द्वितीय |
| राजवंश | पल्लव |
| पिता | महेन्द्रवर्मन प्रथम |
| धर्म | जैन धर्म[2] |
नरसिंहवर्मन प्रथम पल्लव राजा थे। इसने ६३० से ६६८ तक राज किया। इसने महाबलिपुरम में अपने पिता महेन्द्रवर्मन् के आरम्भ किये निर्माण महाबलिपुरम के तट मन्दिर परिसर को पूरा किया। यह मल्ल भी था इसीलिये इसे ममल्लन् भी कहते हैं और इसके सम्मान में महाबलिपुरम् को ममल्लपुरम् भी कहते हैं। इसने पुल्केसिन द्वितीय को हराया। इसके शासन काल में व्हेनसांग ने कांची की यात्रा की थी।
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- ↑ Chhabra, Bahadur Chand (1965). Expansion of Indo-Aryan Culture During Pallava Rule. Munshi Ram Manohar Lal. अभिगमन तिथि: 1 March 2026.
- ↑ Chatterjee, C. D. (1955). The Journal of the U.P. historical society (English भाषा में). p. 117.
The Pallava king Nanimhavarman I (680-668 A.D.) of KANCHI was alo like his father Mahendravarman 1 (600-630 A.D.) a follower and patron of Jainism
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