द्रव्‍य संबंधी विकार

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द्रव्य संबंधी मानसिक विकारों में यदि कोई व्यक्ति जिसे मदिरा धूम्रपान अन्य नशीली वस्तुएं आदि की आदत पड़ गई हो उससे भी मानसिक विकार उत्पन्न हो जाता है जिसे मनोचिकित्सक की मदद से उचित दवाइयां व सीमित तथा निश्चित अनुपात में दी गई दवाइयों की खुराक जिसमें रासायनिक पदार्थों का मिश्रण जिसके अंतर्गत मानसिक रोगी की या नशा करने वाले व्यक्ति का इलाज लंबे समय तक चलता है यदि वह मानसिक रोगी या नशा करने वाला व्यक्ति एन दवा लेने के अंतराल में सही समय पर प्रबंधन के द्वारा दवाइयां लेता है तो उसके मस्तिष्क में नशा द्रव्य विकार समाप्त हो जाता है यदि वह रोगी सही समय पर मनोचिकित्सक की दवाइयों का सेवन नियमित देता है तो उसकी दवाइयां कुछ समय पश्चात मनोचिकित्सक स्वयं ही बंद कर देता है इसमें द्रव्य विकार होने पर मनोचिकित्सक निश्चित अनुपात में दवाई देता है बशर्ते मानसिक रोगी दवाई लेने के अंतराल में नशा व धूम्रपान ना करें यदि कोई नशा करने वाला व्यक्ति दवाई लेने के अंतराल में भी नशा या धूम्रपान करता है तो उसके ठीक होने की दर बिल्कुल कम हो जाएगी मुख्य बात यह है कि द्रव्य संबंधी विकार एक मानसिक रोग है जिसमें व्यक्ति को द्रव्य या नशा या शराब की लत पड़ जाती है तब उचित समय पर उसको मनोचिकित्सक की सहायता या सलाह लेनी चाहिए तदुपरांत मनोचिकित्सक उसे नियमित दिनचर्या की सलाह देता है व्यस्त रहने की सलाह देता है उसे पर्याप्त नींद वह पर्याप्त पोषण पर्याप्त संतुलित आहार की सलाह देता है तथा वह रोगी को उचित आहार लेने के लिए दवाइयों में निर्धारण तथा उचित प्रोटीन विटामिन आदि का मिश्रण करके दवाइयों में देता है कुछ समय पश्चात नियमित दिनचर्या व नियमित दवाइयों के सेवन से दरें संबंधी विकार व्यक्ति में खत्म हो जाते हैं तथा व्यक्ति कि नशे की लत तथा अन्य धूम्रपान शराब की लत खत्म हो जाती है तथा मनोचिकित्सक उसके व्यवहार तथा बॉडी लैंग्वेज देखकर दवाइयों का निर्माण करता है एवं कुछ समय पश्चात यदि मनोरोगी की द्रव्य संबंधी विकार ना होने की स्थिति में उसे दवाइयों से मुक्ति दे देता है बशर्ते मानसिक रोगी में कोई द्रव्य संबंधी विकार के लक्षण ना हो