द्रवचालित संचरण प्रणाली

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द्रवचालित प्रणाली में बल एवं बलाघूर्ण

शक्तिप्रेषण की विधियों में द्रवचालित प्रणाली (हाइड्रॉलिक सिस्टम) सबसे आधुनिक है। द्रवचालित प्रणाली में शक्ति एक तरल की सहायता से प्रेषित की जाती है। यह तरल बहुधा तेल होता है, किंतु कभी कभी जल का भी व्यवहार किया जाता है। द्रवचालित प्रणाली को दो विभागों में विभाजित किया जा सकता है : द्रवचालित स्थितिज प्रणाली और द्रवचालित गतिज प्रणाली।

द्रवचालित स्थितिज प्रणाली[संपादित करें]

द्रवचालित स्थितिज प्रणाली में तरल का मुख्य कार्य दाब की सहायता से शक्ति को प्रेषित करना है। इस प्रणाली के मुख्य अंग हैं : पंप करने का यंत्र, द्रवचालित मोटर और दो मुख्य अंगों को मिलाने के लिए उपकरण। चूँकि पंप करने का तंत्र तरल दाब को प्रेषित करता है, इसलिए यंत्र को प्रेषी कहते हैं। द्रवचालित मोटर तरल दाब की सहायता से शक्ति प्राप्त करता है, इसलिए मोटर को ग्राही (receiver) कहा जाता है। इस प्रकार की प्रणाली का उदाहरण है, द्रवचालित संपीडक (Hydraulic Press)। इसमें पंप करने का यंत्र प्रेषी है और द्रवचालित संपीडक ग्राही। पंप द्वारा किए गए कार्य का उपयोग बल के विरुद्ध तेल को विस्थापित करने के लिए किया जाता है। द्रवचालित संपीडक-पिस्टन (piston) की गति से उत्पन्न अवरोध से बल की उत्पत्ति होती है।

द्रवचालित गतिज प्रणाली[संपादित करें]

द्रवचालित गतिज प्रणाली में, क्रियाशील तरल के प्रवाह की गति के परिवर्तन की सहायता से शक्ति प्रेषित की जाती है। इसमें दाब के परिवर्तन को यथासाध्य कम करने का प्रयास किया जाता है। द्रवचालित गतिज प्रेषी के मुख्य अंग हैं : चालक शैफ्ट पर स्थित अपकेंद्री पंप प्रणोदक और चालित शैफ्ट पर स्थित अपकेंद्री पंप प्रणोदक और चालित शैफ्ट पर स्थित तेल टरबाइन रोटर (rotar)। पंप प्रणोदक और टरबाइन रोटर के बीच तेल के परिवहन से शक्ति चालक शैफ्ट को प्रेषित होती है। इसप्रकार की प्रणाली के उदाहरण हैं : द्रवचालित युग्मन (Hydraulic Coupling), द्रवचालित बलआघूर्ण परिवर्तक (Hydraulic Torque Converter) आदि।

आजकल शक्तिप्रेषण के द्रवचालित तरीके का उपयोग यंत्र को चलाने में अधिक हो रहा है। तरल की दाब की सहायता से आधुनिक यंत्रों में विभिन्न प्रकार की गतियों को प्राप्त किया जाता है। एक या एक से अधिक पंप के द्वारा तेल उच्च दाब पर भेजा जाता है। हाल के कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अत्यधिक प्रगति हुई है। यंत्र में शक्तिप्रेषण के लिए इस विधि के उपयोग से ये लाभ होते हैं :

  • (1) गति एक समान रूप से और धीरे धीरे परिवर्तित की जा सकती है,
  • (2) विस्तृत गतिसीमा प्राप्त होती है,
  • (3) यांत्रिक प्रेषण द्वारा युक्त यंत्र की तुलना में इस विधि से चलनेवाला यंत्र 50% अधिक टिकाऊ होता है,
  • (4) गति की उत्क्रमणीयता शीघ्र एवं आघातहीन रूप में प्राप्त की जा सकती है तथा
  • (5) इस विधि से चलनेवाले यंत्र की डिजाइन और निर्माणविधि आसान होती है।

आधुनिक युग में व्यवहृत प्राय: सभी यंत्रों एवं उपकरणों में शक्तिप्रेषण की इस विधि का प्रयोग हो रहा है। शक्तिप्रेषण की द्रवचालित स्थैतिक प्रणाली का उपयोग इसके अलावा निम्नलिखित यंत्रों में भी होता है : द्रवचालित दाबक, द्रवचालि क्रेन, द्रवचालित लिफ्ट (Hydraulic Lift) आदि। कृषि संबंधी यंत्रों, जैसे ट्रैक्टर आदि में भी शक्तिप्रेषण के द्रवचालित तरीकों का उपयोग होता है।

द्रवचालित गतिज प्रणाली के आधार पर शक्तिप्रेषण के लिए निर्मित, द्रवचालि युग्मन में चालक शैफ्ट और चालित शैफ्ट में कोई यांत्रिक संबंध नहीं रहता है। इस तरह के यंत्र में आघात और कंपन नहीं होता है। द्रवचालित युग्मन में शाक्ति को प्रेषित करते समय चालक और चालित शैफ्ट पर समान बलआधूर्ण कार्य करता बलआधूर्ण की वृद्धि करता है। द्रवचालित युग्मन का उपयोग रेलगाड़ियों और मोटर गाड़ियों में अंतर्दहन इंजन से गतिपाल चक्र को शक्ति प्रेषित करने में किया जाता है। डीजल इंजन चालित युद्धयान में बड़े आकार के द्रवचालित युग्मन का प्रयोग होता है। 1 अश्वशक्ति से लेकर 36,000 अश्वशक्ति तक के द्रवचालित युग्मन का निर्माण हो चुका है। द्रवचालित युग्मन और बलआधूर्ण परिवकं के अनुसंधान के" बाद आधुनिक मोटर गाड़ियों में शक्तिप्रेषण के पुराने प्रकार के उपकरण जैसे दंतिधान आदि का व्यवहार कम ही होने लगा है। इस तरह शक्तिप्रेषण के द्रवचालित तरीकों की उपयोगिता बहुत ही बढ़ गई है और अभी भी नित्य नई नई खोजें हो रही हैं, ताकि इस प्रणाली का कार्यक्षेत्र और भी विस्तृत हो जाए।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]