दो झिरी प्रयोग

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फोटॉन या पदार्थ के कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) जब किसी स्लिट से गुजरते हैं तो तरंग-पैटर्न उत्पन्न करते हैं
एक समतल तरंग से उत्पन्न दो विवर्तन प्रतिरूप (diffraction patterns)

आधुनिक दो-झिरी प्रयोग या द्वि-रेखाछिद्र प्रयोग (double-slit experiment) द्वारा यह प्रदर्शित किया जाता है कि प्रकाश एवं पदार्थ, तरंग एवं कण दोनों के गुण प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा इस प्रयोग से क्वाण्टम यान्त्रिक परिघटना (quantum mechanical phenomena) की प्रायिक प्रकृति (probabilistic nature) भी दिखती है। दो-झिरी वाला एक सरल प्रयोग १८०१ में मूल रूप से थॉमस यंग ने किया था।