दिष्ट धारा

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सबसे ऊपर पारिभाषित धारा को 'शुद्ध धारा' कह सकते हैं। उसके नीचे के तरंगरूप, स्पन्दमान धारा (पल्सेटिंग करेन्ट) कह सकते हैं।

दिष्ट धारा वह धारा है जो सदैव एक ही दिशा में बहती है व जिसकी ध्रुवीयता नियत रहती हैं। इसकी तुलना प्रत्यावर्ती धारा से की जा सकती है जो अपनी ध्रुवीयता (जो कि धारा की दिशा से संबंधित है) निश्चित कालक्रम में बदलती रहती है। इन दोनों ही धाराओं का परिमाण निश्चित रहता है।