त्रिकोणासन

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त्रिकोणासन - विधि[संपादित करें]

दोनो पैरो के बीच लगभग डेड़ फुट का अन्दर रखते हुए सिधे खड़े हो जावें। दोनों हाथ कन्ढों के समानान्तर पार्श्र्व भाग में खुले हुए हो। श्वास अन्दर भरत हुए बायें हाथ को सामने लेत हुए बायें पंजे के पास भूमि पर ट्का दे, अथव हाथ को एड़ी के पास लगायें तथा हाथ को ऊपर की तरफ उठाकर गर्द्न को दायें ओर घुमाते हुए दायें हाथ को देखें। फिर श्वास छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आकर इसी आकार इसी अभ्यास को दूसरी ओर से भी करें।

लाभ[संपादित करें]

कटि प्रदेश लचीला बनता है। पार्श्र्व भाग की चर्बी को कम करता है। पृष्ठांश की मांसपेशियों पर बल पड़ने से उनका स्वास्थ्य सुधरता है। छाती का विकास करता है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]