ड्रुइड
ड्रुइड दूसरी सदी ईसा-पूर्व से लेकर तीसरी सदी ईस्वी[1] तक रोमन के आगमन से पहले ब्रिटेन और गॉल के प्राचीन केल्टिक समाज में पुरोहितों, विद्वानों और धार्मिक नेताओं का एक प्रमुख वर्ग थे।[2][3] ये लोग धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करते थे, न्याय व्यवस्था में भाग लेते थे तथा समाज को शिक्षा और परामर्श प्रदान करते थे। ड्रुइड विशेष रूप से वेदी-पूजन, धार्मिक ज्ञान और औषधीय पौधों के प्रयोग के लिए जाने जाते थे। उनके बारे में यह भी माना जाता है कि वे कभी-कभी मानव और पशुओं की बलि भी देते थे। ड्रुइड का उल्लेख रोमन सेनापति जूलियस सीज़र ने अपने लेखन में किया है। इसके अतिरिक्त यूनानी और रोमन लेखकों की रचनाओं से भी इनके धार्मिक और सामाजिक जीवन के बारे में जानकारी मिलती है।
उत्पत्ति और भूमिका
[संपादित करें]ड्रुइड शब्द का उल्लेख पहली बार यूनानी और रोमन लेखकों द्वारा किया गया है। इनका मुख्य कार्य था:
- धार्मिक यज्ञ और अनुष्ठान करना।
- लोगों को आध्यात्मिक एवं सामाजिक दिशा देना।
- समाज में न्याय और परामर्श प्रदान करना।
- कविता, इतिहास और दर्शन का ज्ञान संरक्षित करना।
धार्मिक मान्यताएँ
[संपादित करें]ड्रुइड प्रकृति की शक्तियों, सूर्य, चंद्रमा और वृक्षों को विशेष महत्व देते थे। पवित्र ओक वृक्ष और मिसलटो इनके धार्मिक प्रतीकों में प्रमुख थे।
पतन
[संपादित करें]रोमन साम्राज्य के विस्तार और ईसाई धर्म के प्रसार के बाद ड्रुइड परंपरा धीरे-धीरे समाप्त हो गई। मध्यकाल तक यह वर्ग लगभग लुप्त हो चुका था।
आधुनिक पुनरुत्थान
[संपादित करें]18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में प्राचीन परंपराओं के प्रति रुचि बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप "नव-ड्रुइडवाद" (Neo-Druidism) नामक एक नई धार्मिक-सांस्कृतिक धारा विकसित हुई।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Wayback Machine" (PDF). ncert.nic.in. अभिगमन तिथि: 2025-09-23.
- ↑ "Who were the Druids?". Historic UK (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-09-23.
- ↑ "Druid | Description, History, & Facts | Britannica". www.britannica.com (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-09-23.