डेविड लिविंग्स्टन

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डेविड लिविंग्स्टन

डेविड लिविंग्स्टन (David Livingstone ; १८१३-१८७३) स्कॉटलैण्ड का चिकित्सा-मिशनरी तथा अफ्रीका महाद्वीप की साहसी यात्रा करने वाला था।

परिचय[संपादित करें]

लेविंग्स्टन का जन्म स्कॉटलैंड में ग्लासगो के निकट ब्लेंटायर नामक स्थान पर १९ मार्च को हुआ था। उसके पिता चाय के व्यापारी थे और धर्मप्रचार में बहुत रुचि रखते थे। डेविड को बाल्यकाल से ही विज्ञान और यात्रा संबंधी पुस्तकों में बहुत रुचि थी। दस वर्ष की अवस्था में उसे स्थानीय कपड़े की मिल में काम करने भेजा गया, परंतु इस कार्य में उसका मन न लगा। ग्लास्गो विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् वह धर्मप्रचारक बना।

१८४० ई. में ८ दिसम्बर को उसने इंग्लैंड से दक्षिण अफ्रीका के लिए प्रस्थान किया। वहाँ पहुँचकर उसने अफ्रीका की भूमि तथा वनस्पति आदि का वर्णन लिखा। उसने वहाँ के निवासियों को खेती करना सिखाया। कालाहारी के मरुस्थल को पार करके उसने १८४९ ई. में नगामी झील का पता लगाया। अपने स्वास्थ्य की परवाह न करके उसने ज़ेबेसी नदी के उत्तरी भाग की यात्राप्रारंभ की और दक्षिण अफ्रीका के पश्चिमी समुद्रतट पर पहुँच गया। इसके पश्चात् उसने विक्टोरिया झरने का पता लगाया। १८५६ ई. के अंत में वह इंग्लैंड लौटा। वहाँ उसका बहुत सम्मान हुआ। १८५८ ई. में वह दूसरी बार दक्षिण अफ्रीका गया। १८६२ ई. में वहीं उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई किंतु उसने साहस न छोड़ा और न्यासा झील का पता लगाकर १८६४ में वह इग्लैंड लौटा। वह एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका गया। इस बार बहुत दिनों तक उसके कोई समाचार न मिले। अंत में स्टैनले ने उसका पता लगाया। फिर दोनों ने टैगैनिका झील और नील नदी के उद्गम स्थान का पता लगाया। रोगों के कारण दक्षिण अफ्रीका में ही १ मई १८७३ को उसकी मृत्यु हो गई।

वह एक दयालु मनुष्य था जो अफ्रीका के निवासियों का जीवन सुधारना चाहता था। इसी भावना से प्रेरित होकर उसने अनेक कष्ट सहकर भी अफ्रीका के अज्ञात प्रदेशों की खोज की।