डिक्री

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डिक्री (Decree) की परिभाषा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा २ (२) में दी गयी है। सामान्य रूप से डिक्री किसी सक्षम न्यायालय के निर्णय की औपचारिक अभिव्यक्ति है जिसके अंतर्गत न्यायालय अपने समक्ष प्रस्तुत वाद में सभी या किन्ही विवादग्रस्त विषयों के सम्बंध में वाद के पक्षकारों के अधिकारों को निश्च्यात्मक रूप से निर्धारित करता है।

डिक्री को 'डिग्री', 'डिगरी' या 'आज्ञप्ति' भी कहते हैं।

डिक्री यह या तो प्रारम्भिक या अंतिम हो सकेगी। यह समझा जाएगा की इसके अन्तर्गत वादपत्र का अस्वीकार किया जाना और धारा १४४ के भीतर के किसी प्रश्न का अवधारणा आता हो, किन्तु इसके अन्तर्गत

  • (क) न तो कोई ऐसा न्याय निर्णयन आएगा जिसकी अपील, आदेश की अपील की भाँति होती है, और
  • (ख) न व्यतिक्रम (default) के लिए ख़ारिज करने का कोई आदेश आएगा।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]