ज्यूसेपे मेत्सिनी

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ज्यूसेपे मेत्सिनी

ज्युसेपे मेत्सिनी (Giuseppe Mazzini ;उच्चारण [dʒuˈzɛppe matˈtsiːni]; 22 जून 1807 – 10 मार्च 1872) इटली के राजनेता, पत्रकार तथा एकीकरण का कार्यकर्ता थे। इनको 'इटली का स्पन्दित हृदय (धड़कता दिल)' कहा जाता था। इन्होंने 1833 बर्न में यंग यूरोप की स्थापना की। यह राजतंत्र के घोर विरोधी थे। उनके प्रयत्नों से इटली स्वतंत्र तथा एकीकृत हुआ। वीर सावरकर मेत्सिनी को अपना आदर्श नायक मानते थे। लाला लाजपत राय मेत्सिनी को अपना राजनीतिक गुरू मानते थे। बाद मे लाला लाजपत राय ने मेत्सिनी की प्रसिद्ध रचना 'द ड्यूटी ऑफ मैन' का उर्दू मे अनुवाद किया । He was born in Genoa in 1807 and become a member of the secret society of the carbonari. As a young man of 24 years he was sent into exile in 1831 for attempting a revolution in Liguria. He founded two underground societies- 1) Young Italy in Marseilles. 2) Young Europe in Berne. Ideas Mazzini believed that God had intended nations to be natural units of mankind. Mazzini's relentless opposition to monarchy and his vision of democratic republics frightened the conservatives. In 1830's the Chancellor of Austria Duke Metternich described him as "the most dangerous enemy of our social order"



Curtsey: NCERT publications

इन्हें भी देखें[संपादित करें]