जॉन डेविस (अंग्रेज नाविक)

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जॉन डेविस (१५५०-१६०५ ई०) एलिजावेथ प्रथम के युग के अंग्रेज नाविकों तथा अन्वेषकों में एक महान् व्यक्ति थे।

इनका जन्म संभवत: १५५०ई० में डेवनशिर (इंग्लैड) के सैड्रिज नामक स्थान पर (डार्टमथ के समीप ) हुआ था। इन्होंने प्रारंभिक जीवन में ऐड्रियन गिल्बर्ट के साथ कई सामुद्रिक यात्राएँ कीं। १५८५ ई० में इन्होंने घटनापूर्ण उत्तर पश्चिमी क्षेत्र की यात्रा प्रारंभ की। फिर मुड़कर पश्चिमी तथा उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र से होते हुए आगे बढ़े और चीन जाने के मार्ग का अन्वेषण करने की योजना बनाई। उसी धुन में चलते हुए ६६ डिग्री उत्तर अक्षांश पर बैफिनलैंड से होकर कंवरलैंड साउंड में कुछ दूर तक गए और वहाँ से अगस्त के अनंत में लौट पड़े। १५८६ तथा १५८७ ई० में बैफिनलैंड में स्थित डेविस जलडमरूमध्य का, जिसका नामकरण इन्हीं के नाम पर हुआ है, पता लगाया और ग्रीनलैंड के पश्चिमी समुद्रक्षेत्र में ७३ डिग्री उत्तर अक्षांश में ऊपरनावक (Upernavik) नामक स्थान तक पहुँचे। इस उत्तर ध्रुवीय क्षेत्र में यात्रा करते हुए इन्होंने कंबरलैंड, केप वाल्सिंघम, एक्सटर साउंड आदि का स्थानांकन तथा नामकरण किया। ऐग्लों-स्पैनिश युद्ध में इन्होंने स्वदेश की ओर से स्पैनिश आर्मेडा के विरूद्ध युद्ध में भी भाग लिया। १९९१ ई० में य टॉमस कैवेंडिश के नेतृत्व में अमरीका के पार्श्ववर्ती उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र का विशद ज्ञान प्राप्त करने के लिये चले, किंतु इनके जहाज के अतिरिक्त अन्य जहाज लौट गए। इनका जहाज आगे बढ़ता गया और इन्होंने फॉकलैंड द्वीपों का अन्वेषण किया। सन् १५६९ में लौटने पर, इन्होंने 'समुद्रयात्री के रहस्य' (Secrets of Seaman) नामक एक प्रयोगात्मक पुस्तक (१५९४ई०) तथा 'संसार की जलीय रूपरेखा' (The world' s Hydrographical Description) नामक सैद्धान्तिक (theoretical) पुस्तक (१५९५ ई०) लिखी। मलय प्रायद्वीप के परातटवर्ती क्षेत्र में बिंटन के समीप २९ या ३० दिसंबर, १६०५ को इनकी मृत्यु हो गई।