जैवभार

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
पुआल के गट्ठर बायोमास बानाने के काम आते हैं।
धान की भूसी को जलाकर ऊर्जा (ऊष्मा) प्राप्त की जा सकती है।
Panicum virgatum का उपयोग जैव मात्रा के रूप में किया जाता है।

जीवित जीवों अथवा हाल ही में मरे हुए जीवों से प्राप्त पदार्थ जैव मात्रा या जैव संहति या 'बायोमास' (Biomass) कहलाता है। प्रायः यहाँ 'जीव' से आशय 'पौधों' से है। बायोमास ऊर्जा के स्रोत हैं। इन्हें सीधे जलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है या इनको विभिन्न प्रकार के जैव ईंधन में परिवर्तित करने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण- गन्ने की खोई, धान की भूसी, अनुपयोगी लकड़ी आदि

बायोमास को जैव ईंधन के रूप में कई प्रकार से बदला जा सकता है, जिन्हें मोटे तौर पर तीन भागों में बांटा जा सकता है- ऊष्मीय विधियाँ, रासायनिक विधियाँ तथा जैवरासायनिक विधियाँ। By Pramit bala

परिचय[संपादित करें]

ऊर्जा उत्पादन की शब्दावली में बायोमास (Biomass) उन सभी जीवधारी पदार्थों को कहते हैं जो या तो जीवित हैं या कुछ ही समय पूर्व मरे हैं। बायोमास मानव को ज्ञात सबसे पुराना ईंधन है। इसके अलावा यह सबसे अधिक विविधतापूर्ण भी है। वर्तमान समय में यह उष्मा और विद्युत उत्पादन का स्वच्छ एवं दक्ष स्रोत भी है। ज्यों-ज्यों अक्षय ऊर्जा का महत्व बढता जा रहा है, त्यों-त्यों बायोमास का उत्पादन भी बढता जा रहा है।

प्रायः बायोमास का अर्थ जैवईंधन प्राप्त करने के लिये उत्पादित वानस्पतिक पदार्थों को ही कहा जाता है लेकिन इस शब्द का प्रयोग जन्तु और पादप जन्य उन सभी वस्तुओं के लिये होता है जो रेशे, रसायन या जैवईंधन के उत्पादन में प्रयुक्त ओते हैं। बायोमास में जैविक रूप से नष्ट किये जा सकने वाला कचरा (जैवकचरा) भी सम्मिलित है जिसको जलाकर ईंधन का काम लिया जा सकता है।

किन्तु बायोमास में वे कार्बनिक पदार्थ सम्मिलित नही हैं जो हजारों वर्षों के भूगर्भीय परिवर्तनों के परिणामस्वरूप कोयला या पेट्रोलियम आदि मे बदल गये हैं। वे जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं।

बायोमास विभिन्न रूपों में पाया जाता है। इसे आसानी से ठोस, गैस या द्रव ईंधन के रूप में बदला जा सकता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]