जैत्र सिंह

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==सन्दर्भ==रावत-राजपूतों का इतिहास. श्री प्रेम सिंह चौहान. 1990.

जैत्र सिंह(1213-1253AD) =====sasankal 1213-1250 , 1213 ई. में मेवाड़ के शासक बने | इन्होंने सबसे पहले पूूर्वजों ( किर्तिपाल चौहान द्वारा सामंत सिंह को हराया गया था ) का अपमाान का बदला लेने के लिए सोनगरा चौहानों शासक उदयसिंह ( सोनगरा ) पर आक्रमण किया किर्तिपाल चौहान द्वारा सामंत सिंह पर किया गया था |

दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने इनके शासनकाल में मेवाड़ राज्य पर आक्रमण किया, क्योंकि इल्तुतमिश मेवाड़ को अपने अधिकार में लाना चाहता था, नागदा को लेकर इल्तुतमिश व जैत्र सिंह के बीच 1226 ई. में भूताला का युद्ध लड़ा गया, हालाँकि इस युद्ध में जैत्र सिंह को विजय श्री प्राप्त हुई, लेकिन इस युद्ध में नागदा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया इस कारण जैत्र सिंह ने नागदा व आहड़ के स्थान पर चित्तौड़गढ़ को अपनी नवीन राजधानी के रूप में स्थापित किया, इनके शासनकाल में मंगोल आक्रमणकारी चंगेज खाँ का आक्रमण हुआ | जैत्र सिंह के अन्तिम शासनकाल में दिल्ली के सुल्तान नसरूद्दीन महमूद का आक्रमण हुआ | इस कारण जैत्र सिंह मेेेवाड़ के लिए विशेष योगदान न देे सका, क्योंकि इसे अपने शासनकाल में आक्रमणों से सामना करना पड़ा, फिर भी जैत्र सिंह ने आहड़ को चालुक्योंं की शक्ति से आजाद करानेे में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | इनके समय में वीहलजी चौहान तत्कालीन ठिकाना चेता के ठिकाणेदार एवं आस-पास के विस्तृत भू-भाग के स्वामी थे। समसुद्दीन इल्तुतमिश दिल्ली से मेवाड़ के शासक रावल जैत्रसिंह पर हमला करने हेतु छापली के पास रात्रि विश्राम हेतु ठहरा हुआ था। रात्रि में वीहलजी ने इल्तुतमिश की मूंछ और उसकी बेगम की चोटी काट दी, जिससे भयभीत होकर वह वापस सेना सहित दिल्ली भाग गया। इस वीरता एवं साहसिक कार्य के लिए मेवाड़ के शासक रावल जैत्रसिंह ने वीहलजी चौहान को 'रावत' की पदवी से विभूषित किया और कुंभलगढ़ के समीप गढ़बोर (चारभुजा) का राज्य प्रदान किया।[1]

  1. रावत-राजपूतों का इतिहास. श्री प्रेम सिंह चौहान. 1990.