जीन भंडार

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जीन भंडार (जीन बैंक) एक प्रकार का जीव कोष है, जहाँ अनुवांशिक पदार्थ को सुरक्षित रखा जाता है। पौधौ में, पौधे के कलम को हिमताप पर रखा जाता है या उसके बीज (अण्डे) को संग्रहण करके रखा जाता है। प्राणियों में, उनके शुक्राणु और अण्डाणु (अण्डे) को प्राणि विज्ञान संबंधि फ्रिज़र में संरक्षित रखा जाता है जबतक कि उसकी आवश्यकता न हो। प्रवाल (Coral) को संग्रह करने के लिए, प्रवाल के टुकड़े को पानी में नियंत्रित हालात में रखा जाता है।(1) जीन बैंक में पौधे के अनुवांशिक पदार्थ को द्रव नाइट्रोजन में -१९६ डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है। पौधे के तथ्य को पिघलाकर उसे फिर से उगाना संभव है, वहीं प्राणियों में, एक जीवित मादा को कृत्रिम गर्भाधान की आवश्यकता होती है। जबकि प्रायः जमी हुई शुक्राणु और अण्डाणु को उपयोग करना मुश्किल है पर इसके बहुत सारे उदाहरण हैं जो सफलतापूर्वक किए गए हैं। कृषि संबंधि जैव विविधता को संरक्षित करने के प्रयाश में , प्रमुख फसल और उसके जंगली अनुरूप के अनुवांशिक स्रोत को जीन बैंक में संग्रह कर सुरक्षित रखा गया है। पूरे विश्व में बहुत सारे जीन बैंक है, संभवतः उसमे सबसे प्रमुख स्वल्बर्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट (Svalbard Global Seed Vault) है।

जीन बैंकों (जीन भंडारों) के प्रकार[संपादित करें]

बीज भंडार[संपादित करें]

बीज भंडार में सूखे बीज को बहुत कम ताप में संग्रह कर संरक्षण किया जाता है। बीजाणु (Spores) और टेरिडोफाइट (Pteridophytes) को बीज कोष में संरक्षित किया जाता है जबकि बीजरहित पौधे को संरक्षित नहीं किया जा सकता है। विश्व का सबसे बड़ा बीज कोष मिलेनियम सीड बैंक (Millennium Seed Bank ) है।(2)

ऊतक भंडार[संपादित करें]

इस तकनीक में कली, प्रोटोकोर्म (Protocorm) और मेरिस्टेमेटिक कोशिकाओ को पुष्टिकारक माध्यम में विशेष प्रकाश और तापमान पर संरक्षित किया जाता है। इस तकनीक का प्रयोग बीजरहित पौधो और अलैंगिक प्रजनन करने वाले पौधे को सुरक्षित करने में किया जाता है।

निम्नताप भंडार (क्रायोबैंक)[संपादित करें]

इस तकनीक में बीज या भ्रूण को बहुत कम तापमान में सुरक्षित रखा जाता है। इसे आमतौर पर द्रव नाइट्रोजन में -१९६ डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखा जाता है। यह विलुप्त हो रहे प्रजातियों के संरक्षण के लिए लाभदायक है।(3)

पराग भंडार[संपादित करें]

पराग बैंक में पराग कण को संग्रह किया जाता है। वर्तमान में जो प्रजाति लुप्त हो रही है, उसका पौधा बनाया जाता है। इस तकनीक का प्रयोग कर हम एक गुणसूत्र समूह वाले पौधो बना सकते हैं।

क्षेत्र का जीव भंडार[संपादित करें]

इस प्रणाली में जीन संरक्षण के लिए पौधे को रोपा जाता है। इस उद्देश्य के लिए, कृत्रिम पारितंत्र बनाया जाता है। इस प्रणाली से, पौधे के अलग-अलग प्रजातियों में असमानता की तुलना और विस्तार से अध्ययन किया जा सकता है। इसमे अधिक भूमि, योग्य मिट्टी, मौसम आदि की आवश्यकता होती है। इस प्रणाली से, महत्वपूर्ण फसलों के जनन द्रव (जर्म प्लाज्म) को संरक्षित किया जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]