जायसवाल ब्राह्मण

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जायसवाल ब्राह्मण समाज

ब्राह्मणो को मुख्यतः दो भौगोलिक वर्गो मे बांटा जाता है।

१. पंच गौड़(विंध्याचल के उत्तर) २. पंच द्रविड़(विंध्याचल के दक्षिण)

ब्राह्मण जायसवाल पंच गौड़ मे कान्यकुब्ज ब्राह्मण की शाखा है। ब्राह्मण जायसवाल मुख्यतः चंद्रवंशी या गाढ़ीवाल होते है। सूर्यवंश से भिन्न चंद्रवंश मे जगह जगह पर क्षात्रत्व एव ब्राह्मणत्व के उत्तम गुणो का प्रागट्यकरण दिखाई पड़ता है। कई उत्तम ब्राह्मण वंशावली का उद्गम चंद्रवंश से हुआ है। यह भी मान्यता है की जायसवाल नागर ब्राह्मण होते है। जायसवालों की नागर एवं शाकाद्वीपी ब्राह्मणो से ऐतिहासिक साम्यता है। एक विचार शाला अनुसार यह भी माना जाता है की ब्राह्मण जायसवालों के मूल दक्षिण यूरोप या मध्यपूर्व मे रहे है।

कुछ जायसवाल नेपाल या उत्तर भारत के चौराशी ब्राह्मण होते है उन्हे शिव ब्राह्मण भी कहा जाता है।। उत्तर के चौराशी और नगरो के बीच मजबूत कड़ी है। नाग या नागर वेल भी विशिष्ट कड़ी है।

कुछ जायसवाल स्वर्णकार ब्राह्मण होते है। यह संभवतः व्यावसायिक कारणो से है।

ब्राह्मण जायसवाल उत्कल और बर्मन ब्राह्मणो मे भी पाये जाते है।

ऐतिहासिक कारणो से कुछ शतक पूर्व कई ब्राह्मण जायसवाल परिवार उत्तर भारत से गुजरात मे जाकर बस गए। उनमे से ज़्यादातर ब्राह्मण ठाकुर (जागीरदार) है।

सरनेम ब्राह्मण जायसवाल समान्यतः

जायसवाल जयस्वाल गौर गर्ग भगत वैश दूबे प्रसाद चौधरी राय ठाकुर साहू मालवीय गुप्ता शर्मा वर्मा या वर्मन या बर्मन इत्यादि सरनेम लिखते है।

उत्तर एवं पूर्व भारत के ब्राह्मण समान्यतः अपने नाम के पीछे Name Suffix:

- रंजन - चन्द्र - राम - प्रसाद - कुमार

लगाते है जो की सिर्फ ब्राह्मणो द्वारा उपयोग मे लाये जाते रहे थे।

ब्राह्मण होते हुए भी चंद्रवंशी जायसवाल निपुण शाशक और बहादुर योद्धा रहे है। ऐतिहासिक समयान्तरों मे उन्होने मध्यपूर्वा से लेकरके फार ईस्ट तक विविध भूभागो पर राज्य शाशन किया है अतः उन्हे जायसवाल राजपूत या योद्धा ब्राह्मण भी वर्गित किया जाता है।

पूर्व व उत्तर पूर्व भारत एवं दक्षिण पूर्व एशिया व फार ईस्ट देशो के ब्राह्मण राजवंशी (Dynasty) राजा अपने नाम के पीछे (Name Prefix) या मध्य नाम (Middle Name) –गुप्ता और –वर्मा या –वर्मन या –बर्मन लगाते थे। मोंगोलीयन्स और बुध्धिस्ट व इस्लामिक कट्टरवादियो के हाथो अपनी सत्ता खोने के बाद उनके (descendants) पीढ़िजनोने गुप्ता व वर्मा या वर्मन या बर्मन को अटक के तौर पर अपना लिया।

e.g. King Sri Gupta ruled parts of North and North-East India, East Pakistan, parts of western India etc., King Rudravarma of Champa(Vietnam), King Jayavarma I of Kambuja(Kampuchea or Cambodia), Kings of other Far Eastern Ilands and regions.

ब्राह्मण गुप्ता वैध्य ब्राह्मण माने जाते है और वे आयुर्वेद के पितामह व तबीबी शास्त्र के भगवान धन्वन्तरी के (descendants) पीढ़िजन है।

जायसवाल जगीरदार या जमींदार (ठाकुर) महसूली कार्यभार निभाते थे।

कुछ देशश्थ (महाराष्ट्र द्रविड़) जायसवाल ब्राह्मण अटके जैसे की महाजन, काळे, प्रसाद, चौधरी, दहेले इत्यादि भी पायी जाती है।

गौड़ सारस्वत एव गौड़ सारस्वत कोंकणस्थ मे भी जायसवाल ब्राह्मण पाये जाते है।


धार्मिक मान्यताए जायसवाल ब्राह्मण हिन्दू धर्मी होते है। कुलदेवी माँ, शक्ति माँ, महाकाली माँ, अंबिका माँ कालभैरव, शिवजी कुलदेवता (देवतन महाराज) माँ के सारथी नारसंग देव इत्यादि का पूजन करते है। लगभग ३०० वर्ष पूर्व कई जायसवाल परिवार परम पूजनीय आदरणीय श्री वल्लभाचार्यजी के संसर्ग मे वैष्णव संप्रदाय मे आस्था रखने लगे और उन्होने उस अनुसार धार्मिक परम्पराओ को अपनाया। कई जायसवाल परिवार जैन संप्रदाय मे आस्था रखते है। वर्तमान समय मे कुछ जायसवाल परिवार स्वामीनारायण संप्रदाय मे भी आस्था रखने लगे है।

व्यवसाय पारंपरिक रूप से जायसवाल कर्मकांडी नहीं रहे है बल्कि ज़्यादातर शाशन व्यवस्था, जागीरदारी, ठेकेदारी, इत्यादि से जुड़े रहे है। वर्तमान समय मे जायसवाल समुदाय के लोग राजनीति, ब्यूरोक्रसी, सरकारी सेवाए, डिफेंस, एजुकेशन, न्यायपालिका, नागरिक उड्डयन, कॉर्पोरेट हाउसिस, होटल एवं रिज़ॉर्ट, मेडिकल हैल्थ केयर, तकनीकी, रिसर्च, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग व्यवसाय, कोण्ट्राक्टिंग या ठेकेदारी, ज्वेलर्स समेत कई क्षेत्रो मे उच्चतम स्थानो तक पाये जाते है।

खान पान सामान्यत: आज कल सभी ब्राह्मण शाकाहारी होते है। जब कि ठण्डे पहाडी प्रदेश जैसे कि कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, नेपाल से ताल्लुक रखनेवाले ब्राह्मण मान्साहारी भी हो सकते है। तटवर्तिय प्रदेश जैसे कि बंगाल, उड़ीसा के ब्राह्मण मत्स्याहारी होते है।

गोत्र ब्रह्म समाज के सदस्य १ गोत्र २ सूत्र (कल्प) ३ शाखा (वेद) ४ प्रवर (३ या ५ ऋषि) से जाने जाते रहे है। मूल गोत्र ९ ऋषि अग्निरस, अत्री, गौतम, कश्यप, भृगु, वसिष्ठ, कुत्स, भारद्वाज एव विश्वामित्र से माने जाते है। सात ऋषि अगतस्य, अग्निरस, अत्री, भृगु, कश्यप, वसिष्ठ, विश्वामित्र से जुड़े ३ या ५ ऋषि प्रवर होते है।


जायसवाल ब्राह्मण गोत्र:

कात्यायन उपमन्यु गौतम गर्ग वसिष्ठ गौर भार्गव वत्स कौशिक धनंजय संकृत कविस्तु पराशर सवर्ण कश्यप, काश्यपा, काश्यप भारद्वाज शांडिल्य मित्रा विश्वामित्र ऋषि ब्रह्मचारी गौरहर चौरसिया शिव शर्मा बाराई भगत चौराशी रसेला राजधीर