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जप

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
भूटान का एक बौद्ध स्त्री माला लेकर जप करती हुई

किसी मन्त्र को या देवता के नाम को बार-बार उच्चारित करना, जप कहलाता है। जप, हिन्दू धर्म[1] जैन धर्म,[2] सिख धर्म,[3][4] बौद्ध धर्म,[5] आदि भारत के मूल धर्मों तथा शिन्तो धर्म में प्रचलित है।

सन्दर्भ

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  1. Guy L. Beck (1995). Sonic Theology: Hinduism and Sacred Sound. Motilal Banarsidass. pp. 92–93, 132–134. ISBN 978-81-208-1261-1. 22 दिसंबर 2019 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 15 जनवरी 2020.
  2. Christopher Key Chapple (2015). Yoga in Jainism. Taylor & Francis. pp. 311–312. ISBN 978-1-317-57217-6. 13 जनवरी 2020 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 15 जनवरी 2020.
  3. S Deol (1998), Japji: The Path of Devotional Meditation, ISBN 978-0966102703, page 11
  4. SS Kohli (1993). The Sikh and Sikhism. Atlantic Publishers. pp. 33–34. 24 दिसंबर 2019 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 15 जनवरी 2020.
  5. Shashi Bhushan Dasgupta; Sashibhusan Dasgupta (1958). An Introduction to Tāntric Buddhism. Calcutta University Press. pp. 167–168.