जगजीत कौर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
जगजीत कौर
Jagjit Kaur.jpg
जन्म 1930-31
चंडीगढ़(पंजाब)
आवास मुम्बई
व्यवसाय मशहूर पार्श्व गायिका
जीवनसाथी मो. ज़हूर ख़य्याम

जगजीत कौर हिंदी फिल्म जगत के मशहूर संगीतकार ख़य्याम की पत्नी और ख़ुद एक मशहूर पार्श्व गायिका थीं। स्वाधीनता दिवस 15 अगस्त 2021 की सुबह 5.30 बजे उनका निधन हो गया। मुंबई में जुहू के दक्षिणा पार्क स्थित उनके निवास से उनकी अंतिम यात्रा निकली, जहां 'दिल तो पागल है' व 'गदर' फैम विख्यात संगीतकार उत्तम सिंह, अभिनेत्री पद्मिनी कपिला एवं राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार सहित कई प्रमुख लोगों ने उनको अंतिम विदाई दी। पवनहंस श्मशान गृह पर प्रसिद्ध गायक अनूप जलोटा के कुछ फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में उनकी पार्थिव देह का अग्नि संस्कार हुआ। जगजीत कौर ख़य्याम द्वारा संगीतबद्ध किये गए लोकगीतों, शास्त्रीय संगीत और ग़ज़लों के लिये आवाज़ देने के लिए जानी जाती हैं। 1950 के दशक में उन्होंने फिल्मों के लिए गाना शुरू किया और 1980 तक लगातार सिने जगत से जुड़ी रहीं। ख़य्याम द्वारा संगीतबद्ध किया फ़िल्म शगुन का मशहूर गीत- तुम अपना रंज़ो ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो जगजीत कौर द्वारा गाये गए शानदार गानों मे से एक है। जगजीत कौर द्वारा गाये गए ज़्यादातर गीत लोकसंगीत पर आधारित थे जो आज भी सुनने वालों की यादों में बस जाते हैं।

प्रारम्भिक जीवन[संपादित करें]

जगजीत कौर का जन्म 1930-31 के आसपास चंडीगढ़ (पंजाब) के एक रसूख़दार परिवार में हुआ। फिल्मों में प्लेबैक सिंगर बनने का ख़्वाब लिए जगजीत कौर मुम्बई आ गईं। ये 1954 की बात है एक दिन मुम्बई के दादर स्टेशन के ओवर ब्रिज़ के ऊपर जगजीत कौर को लगा कि कोई उनका पीछा कर रहा है, वे सतर्क होकर अलार्म बजाना ही चाह रही थीं कि उस शख़्स ने आकर अपना परिचय फिल्मों के संगीतकार के रूप में दिया। वो शख़्स थे मशहूर संगीतकार मो. ज़हूर ख़य्याम जिन्हें आज दुनिया ख़य्याम साहब के नाम से जानती है। दोनों की ये मुलाक़ात दोस्ती में बदली और जगजीत कौर के पिता के विरोध के बाद भी दोनों ने विवाह कर लिया। कहा जाता है कि इन दोनों का विवाह भारतीय फ़िल्म जगत का पहला अंतरजातीय विवाह था। 1954 में शुरू हुई ये प्रेम कहानी (19 अगस्त 2019) ख़य्याम साहब के फना होते तक बदस्तूर ज़ारी रही, और 15 अगस्त 2021 को जगजीत कौर भी दुनिया को अलविदा कह गईं।

व्यक्तिगत जीवन और मृत्यु[संपादित करें]

कौर ने 1954 में संगीतकार मोहम्मद ज़हूर खय्याम से शादी की, जो भारतीय फिल्म उद्योग में पहली अंतर-सांप्रदायिक शादियों में से एक थी[1]। उनका एक बेटा था, प्रदीप, जिसकी 2012 में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। अपने बेटे की मदद करने की प्रकृति से प्रेरित होकर, उन्होंने कलाकारों और तकनीशियनों की ज़रूरत में मदद करने के लिए "खय्याम जगजीत कौर केपीजी चैरिटेबल ट्रस्ट" ट्रस्ट शुरू किया।[2] खय्याम का 19 अगस्त 2019 को 92 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से निधन हो गया।[3] कौर का निधन 15 अगस्त 2021 को हुआ था।[4][5]

कुछ रोचक तथ्य[संपादित करें]

  1. जगजीत कौर ने ख़य्याम साहब की मदद करने के लिये उनकी धुनों को अपनी आवाज़ तो दी ही, उन्हें कम्पोज़िंग में भी मदद करती थीं। ख़य्याम साहब चाहते थे कि इसका श्रेय उन्हें भी मिले और वो नाम देना चाहते थे- ख़य्याम-जगजीत कौर, लेकिन जगजीत जी को यह पसंद नहीं था और वे उन्हें बेनाम मदद करती रहीं।
  2. जगजीत कौर ने हर उस फ़िल्म में कम से कम एक गीत गाया जिसकी कम्पोजिंग ख़य्याम साहब ने की, शायद आख़िरी ख़त एक अपवाद फ़िल्म थी।
  3. कमाल आमरोही अपने ड्रीम प्रोजेक्ट पाकीज़ा पर काम कर रहे थे और फ़िल्म पूरी होने में काफ़ी समय लग रहा था कहते हैं कि उस समय जगजीत कौर ने उन्हें प्रेरित किया और फ़िल्म पूरी करवाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

जगजीत कौर के कुछ यादगार गीत:[संपादित करें]

 1. "खामोश ज़िन्दगी को अफसाना मिल गया”..दिल-ए-नादान (1953), गीत-शकील बदायुनी, संगीत-ग़ुलाम मोहम्मद

  2. "पहले तो आँख मिलाना", शोला और शबनम (1961) (रफ़ी के साथ) गीत-कैफ़ी आज़मी, संगीत-ख़य्याम

  3. "लाडी रे लाडी तुझसे आंख जो लाडी", शोला और शबनम (1961) गीत-कैफ़ी आज़मी, संगीत-ख़य्याम  

  4. "देखो देखो जी गोरी ससुराल चली" शगुन (1964), गीत-साहिर लुधियानवी, संगीत-ख़य्याम

  5. "तुम अपना रंज-ओ-ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो" शगुन (1964), गीत-साहिर लुधियानवी, संगीत-ख़य्याम

  6. "नैन मिलाके, प्यार जताके, आग लगा दी" (रफी के साथ) मेरा भाई मेरा दुश्मन (1967), संगीत-ख़य्याम

  7. "साडा चिदिया दा चम्बा वे" कभी-कभी (1976), (पामेला चोपड़ा के साथ)  संगीत-ख़य्याम

  8. "चले आओ सैयां रंगीले मैं वारी रे" बाज़ार (1981), (पामेला चोपड़ा के साथ) गीत-जगजीत कौर, संगीत-ख़य्याम    

  9. "देख लो आज हमको जी भर के" बाज़ार(1981), गीत-मिर्ज़ा शौक़, संगीत-ख़य्याम

10.  "काहे को ब्याही विदेस" उमराव जान (1981), संगीत-ख़य्याम

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "1954: A love story, featuring Khayyam and Jagjit Kaur". Mumbai Mirror. 14 August 2019. अभिगमन तिथि 20 August 2019.
  2. "We were inspired by the divine to do what we did: Khayyam & Updates at Daily News & Analysis". DNA India. 22 May 2016. अभिगमन तिथि 20 August 2019.
  3. "Music composer Khayyam passes away". The Indian Express. 19 August 2019. अभिगमन तिथि 20 August 2019.
  4. Service, Tribune News. "Jagjit Kaur, veteran singer and wife of composer Khayyam, dies at 93". Tribuneindia News Service (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2021-08-15.
  5. "Jagjit Kaur, veteran singer and wife of composer Khayyam, dies at 93 - Times of India". The Times of India (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2021-08-15.

https://web.archive.org/web/20161223070645/https://en.wikipedia.org/wiki/Jagjit_Kaur

https://web.archive.org/web/20190823110927/https://starsunfolded.com/jagjit-kaur/