चितपावन

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चितपावन बिहार के भूमिहार ब्राह्मणों का एक समूह है जिनका वर्तमान निवास स्थान मुख्यतः महाराष्ट्र एवं कोंकण क्षेत्र है।

छठी-सातवीं सदी के आस-पास बिहार से भूमिहार ब्राह्मण का एक जत्था चलकर महाराष्ट्र के कोंकण में जा बसा और आगे चलकर यही चितपावन कहलाए ।

पुनः 13 वीं सदी के आस-पास कोंकण के चितपावनों का एक जत्था वहां से निकल कर अविभाजित बिहार के दक्षिणी हिस्सों में  जा बसे और आज वे चितपौनिया भूमिहार के नाम से जाने जाते हैं |

इनके बारे में एक दूसरा मिथक भी है जिसके अनुसार, भगवान श्री परशुराम ने एक यज्ञ किया था जहाँ से चितपावन की उतपत्ति हुई थी।

चितपावन का अर्थ है (चित्त+पावन)। अर्थात जिसका चित्त(मन+आत्मा) पूर्ण रूप से पावन(शुद्ध+पाप रहित) है वह चितपावन है।

सन्दर्भ[संपादित करें]