चतुर्थ बौद्ध संगीति

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चतुर्थ बौद्ध संगीति दो भिन्न बौद्ध संगीति बैठकों का नाम है। पहली श्रीलंका में प्रथम ईशा पूर्व हुई थी। चतुर्थ बौद्ध संगीति में थेरवाद त्रिपिटक को ताड़ के पतों पर लिखा गया। यह संगीति कश्मीर के कुण्डलवं में कनिष्क के काल में हुई थी।[1] दूसरी सर्वास्तिवाद विद्यालय, कश्मीर में पहली शताब्दी में हुई।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. एलिजाबेथ लियोन्स, हीथ पीटर्स, चेंग-मेई चांग (1985). "Buddhism: History and Diversity of a Great Tradition" [बौद्ध धर्म: महान परम्परा का इतिहास और विविधता] (अंग्रेज़ी में). उप्पेन पुरातत्व संग्रहालय. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780934718769.
  2. एम॰के॰ कॉव (2001). Kashmiri Pandits: Looking to the Future [कश्मीरी पंडित: भविष्य की तरफ] (अंग्रेज़ी में). एपीएच पब्लिशिंग. पृ॰ 88. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788176482363.