घोनिया

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घोनिया गाँव बाड़मेर जिला मुख्यालय से 64 किमी दुर चौहटन तहसिल से 15 किलोमिटर दूर पश्चिम में स्थित है। इस गाँव की स्थापना दादा भिँयड़ के वंशजो द्वारा कि गई है। यह गाँव भोपा राजपूतो कि कर्म भूमि रही है। भोपा जाति की कुलदेवी विरात्रा की वाँकल माँ है।मां वांकल कै मन्दिर कि निव श्री मौहबतसिह जी भोपा ने रखी थी उनका परिवार आज घोनिया गांव में रहता है यहाँ के धार्मिक स्थलों में जोगमाया मन्दिर और गोराणा माता का मन्दिर प्रसिद्ध है। यहा राजकीय उत्कृष्ट विद्यालय स्थित हैं| घोनिया गांव से 6 किलोमीटर दक्षिण मे बीजराङ गांव है जिसमे ऊँचे धोरे पर मां वांकल मां गोरणा माता का मंन्दिर है जो विरात्रा से संबध्दित है तथा इस गांव के पश्चिम मे सारणो व सियागो कि ढाणी केर फांटा के पास मा टुंका माता का मंदिर है जो कि वीरात्रा से संबंधित होते हुए भी लोग इस मंदिर के प्रति जानकार नही है [1]

सन्दर्भ[संपादित करें]