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खारवेल

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खारवेल
चक्रवर्ती
कलिंगाधिपति
महाराजा
संभवतः एक शाही दृश्य जिसमें रानीगुम्फा उदयगिरि और खंडगिरि में राजा खारवेल को उनकी रानी के साथ दर्शाया गया है
कलिंग के राजा
कार्यकालदूसरी और पहली सदी ईसा पूर्व
पूर्ववर्तीसम्भवतः वृद्धराजा (वुधराज के नाम से भी जाने जाते हैं)
उत्तरवर्तीसम्भवतः वक्रदेव (वकदेप के नाम से भी जाने जाते हैं)
जन्मल॰पहली ईसा पूर्व के मध्य
कलिंग,(वर्तमान ओडिशा, भारत)
जीवनसंगीसम्पत के सिंधुला[1]
संतानकुदेपसिरी
राजवंशमहामेघवाहन

सैन्य सेवा

युद्ध/झड़पें
  • विदर्भ पर खारवेल का आक्रमण
धर्मजैन धर्म

खारवेल[a] दूसरी से पहली सदी ईसा पूर्व के समय कलिंग (वर्ममान में भारत के पूर्वी तट पर स्थित) के सम्राट थे। खारवेल का प्राथमिक स्रोत उनका चट्टान पर बना हाथीगुम्फा शिलालेख है। शिलालेख पर दिनांक नहीं है और इसकी 17 पंक्तियों में से केवल चार पंक्तियाँ ही पूरी तरह से पठनीय हैं, अन्य पंक्तियाँ अस्पष्ट हैं और विद्वानों द्वारा अलग-अलग अर्थ समझे जाते हैं। जैन धर्म से संबंधित वाक्यांशो के साथ लिखे गये शिलालेख में उनके शासनकाल का वर्षवार विवरण मिलता है और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, कल्याणकारी गतिविधियों, कलाओं के संरक्षण तथा कई सैन्य जीतों का श्रेय उन्हें दिया गया है। इतिहासकार इस बात पर सहमत हैं कि यह खारवेल की सबसे अच्छी और सबसे पूर्ण जीवनी है। वे जैन धर्म के अनुयायी थे।

टिप्पणी

  1. खारबेल भी लिखा जा सकता है।

सन्दर्भ

  1. हेरमन कुलके; डितमार रदरमुंड (2004). A History of India. Psychology Press. p. 101. ISBN 978-0-415-32920-0.