क्लीशे

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क्लीशे या घिसा-पिटा या पिष्टोक्ति एक ऐसा वाक्य, विचार, या कला का तत्व होता है जो बहुत अधिक प्रयोग होने की वजह से अपना मूल अर्थ खो चूका हुआ। अक्सर यह ऐसी चीजें होती हैं जो आरम्भ में बहुत अर्थपूर्ण, नवीन या नाज़ुक समझी जाती हों।

उदहारण के लिए एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका से कहना के "मै तुम्हारे लिए तारे तोड़ लाऊँगा" किसी ज़माने में बहुत अर्थ रखता था लेकिन अब एक क्लिशे बनकर अर्थहीन हो चुका है। इसी तरह भारतीय राजनीति में "हमारा उद्देश्य ग़रीबों की मदद करना है" एक घिसा-पिटा नारा बन चुका है। कला में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल करना नौसिखिये या मध्यम-स्तरीय होने की निशानी माना जाता है। यह ज़रूरी नहीं है के क्लिशे का प्रयोग हमेशा झूँठ या धूर्तता दिखलाता है - यह सच्चाई और इमानदारी से भी प्रयोग हो सकता है। लेकिन सुनने या देखने वाले के लिए घिसी-पिटी चीज़ में आश्चर्य या भावुकता नहीं उत्पन्न होती। उदहारण के लिए किसी फ़िल्म में "मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ" का वाक्य सच्चाई से भी कहा जाए तो भी उपहास का विषय बन चुका है।

शब्द की उत्पत्ति[संपादित करें]

"घिसे-पिटे" को अंग्रेज़ी में "क्लीशे" (cliché) कहा जाता है, जो फ़्रांसिसी से लिया गया शब्द है। लेकिन माना जाता है के यह शब्द मूलतः किसी भी भाषा का नहीं है। जब काग़ज़ पर प्रेस की छपाई नयी-नयी आरम्भ हुई थी तो एक प्लेट पर मुद्राक्षरों (लोहे के अक्षरों) को एक-एक कर के जोड़ने से वाक्य बनाए जाते थे जिनसे फिर हज़ारों पन्नों पर छपाई की जाती थी। लोहे के अक्षरों से ऐसे वाक्यों को बनाने में "क्लिशे" से मिलती-जुलती आवाज़ आती थी। इस वजह से कला और साहित्य की दुनिया में जो चीज़ हज़ारों बार थोक में प्रयोग हो उसे 'क्लिशे' कहा जाने लगा।[1]

ध्यान रहे के व्याकरण के नज़रिए से "घिसा-पिटा" एक विशेषण है और संज्ञा कभी नहीं होता (यानि "यह वाक्य एक घिसा-पिटा है" ग़लत प्रयोग होगा और "यह वाक्य एक घिसा-पिटा वाक्य है" सही प्रयोग होगा)। इसके विपरीत "क्लिशे" एक विशेषण भी हो सकता है और एक संज्ञा भी। "यह वाक्य एक क्लिशे है" सही प्रयोग है। "यह वाक्य एक क्लिशे वाक्य है" भी सही है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Economy of Ulysses: Making Both Ends MeetIrish Studies, Mark Osteen, pp. 362, Syracuse University Press, 1995, ISBN 978-0-8156-2661-9, ... Originally a printing term like its semantic kin stereotype, cliche was an onomatopoeic word coined to mimic the sound of a new style of mechanical printing that used a solid plate or type-metal cast taken from a form, rather than the form itself ...