कालाशोक
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| कालाशोक | |
|---|---|
| मगध के राजा | |
| शासनावधि | ल॰ 395 – ल॰ 367 BCE |
| पूर्ववर्ती | शिशुनाग |
| उत्तरवर्ती | नन्दिवर्धन (मगध का सिंहासन) |
| संतान | भद्रसेन कोरन्दवर्ण मंगुर सर्वञ्जह जलिक उभक संजय कोरव्य नन्दिवर्धन पञ्चमक |
| राजवंश | शिशुनाग वंश |
| पिता | शैशुनाग |
कालाशोक या काकवर्ण महाराज शिशुनाग के पुत्र और उनके उत्तराधिकारी थे।[1] उन्होंने अपने राज्य को अपने दस पुत्रों के बीच बाँट दिया और अपने नौवें पुत्र नन्दिवर्धन को मगध का राजा बनाया।
शासन
[संपादित करें]शिशुनाग ने मगध की राजधानी को वैशाली स्थानांतरित कर दिया था।[2] कालाशोक ने अपने पिता शिशुनाग का उत्तराधिकार किया।[3][1][4] कलाशोक ने पुनः राजधानी को पाटलिपुत्र स्थानांतरित किया।[4]
बौद्ध साहित्य के अनुसार, द्वितीय बौद्ध संगीति, जो भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के 100 वर्ष बाद वैशाली में आयोजित हुई थी, का संरक्षण राजा कालाशोक ने किया था।[4] परन्तु राजा कालाशोक के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, बौद्धों के बीच मतभेद बने रहे।[5] उन्होंने अपने राज्य को अपने दस पुत्रों के बीच बाँट दिया, जो एक साथ शासन करते थे।[6]
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संदर्भ
[संपादित करें]- 1 2 Upinder Singh 2016, p. 272.
- ↑ Kailash Chand Jain 1972, p. 103.
- ↑ Raychaudhuri 1972, pp. 193–5.
- 1 2 3 FAST GENERAL KNOWLEDGE FOR SSC/RRB RAILWAY/UPSC/CDS/NDA/ARMY/NAVY/AIRFORCE/CTET/TEACHING (EBook) (English भाषा में). Mocktime Publication.
{{cite book}}: CS1 maint: unrecognized language (link) - ↑ S. Srikanta Sastri; S. Naganath (English Translation) (28 July 2021). Indian Culture A Compendium of Indian History, Culture and Heritage (EBook) (English भाषा में). Notion Press. ISBN 9781638065111.
{{cite book}}: CS1 maint: unrecognized language (link) - ↑ Manju Bhashini. My Book of History & Civics 6 (English भाषा में). Saraswati House Pvt Ltd. p. 58. ISBN 9789353624453.
{{cite book}}: CS1 maint: unrecognized language (link)