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कंप्यूटर ग्राफिक्स

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ब्लेंडर २.४५ का स्क्रीनशॉट.
एक त्रिआयामी प्रक्षेप का द्विआयामी प्रक्षेप जिसमें एक चतुरायामी पेंटाकोरॉन को दो ऑर्थोगोनल समतलों के चारों ओर दोहरा घूर्णन करते दिखाया गया है।

कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर के सहयोग से सृजित ग्राफिक्स यानि रेखाचित्र होते हैं। इनमें अधिकांशतः चित्र डाटा का कंप्यूटर के द्वारा प्रदर्शन और परिवर्तन किया गया होता है। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के विकास से कंप्यूटरों के कई प्रकार के डाटा को समझने, भाषांतर करने और प्रयोग करने के अनुभव बढ़े हैं। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के क्षेत्र में विकास के साथ एनिमेशन, मूवीज़ और वीडियो खेलों में बहुत बड़ी प्रगति हुई है।

ब्लेंडर २.४५ का स्क्रीनशॉट.
एक त्रिआयामी प्रक्षेप का द्विआयामी प्रक्षेप जिसमें एक चतुरायामी पेंटाकोरॉन को दो ऑर्थोगोनल समतलों के चारों ओर दोहरा घूर्णन करते दिखाया गया है।

कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर के सहयोग से सृजित ग्राफिक्स यानि रेखाचित्र होते हैं। इनमें अधिकांशतः चित्र डाटा का कंप्यूटर के द्वारा प्रदर्शन और परिवर्तन किया गया होता है। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के विकास से कंप्यूटरों के कई प्रकार के डाटा को समझने, भाषांतर करने और प्रयोग करने के अनुभव बढ़े हैं। कंप्यूटर ग्राफ़िक्स के क्षेत्र में विकास के साथ एनिमेशन, मूवीज़ और वीडियो खेलों में बहुत बड़ी प्रगति हुई है।

पृष्ठभूमि

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कंप्यूटर चित्रांकन की शुरुआत का श्रेय आइवन सदरलैंड को दिया जाता है, जिन्होंने सन् 1961 में मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान में अपने शोध कार्य के दौरान स्केचपैड नामक कार्यक्रम बनाया। यह मानव और कंप्यूटर के बीच चित्र आधारित संपर्क का प्रारंभिक उदाहरण था। इसमें प्रकाश कलम और रेखीय चित्रांकन पद्धति का उपयोग किया गया, जिससे डिजाइनर पारंपरिक कलम-कागज की तुलना में अधिक सटीक और रचनात्मक चित्र बना सके।

विकास और प्रभाव

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बाद में अन्य वैज्ञानिकों ने बिंदु आधारित चित्रांकन तकनीक विकसित की, जो आधुनिक ग्राफिक्स की नींव बनी। माउस उपकरण और चित्र आधारित उपयोगकर्ता प्रणाली के आगमन से 1980 के दशक में कंप्यूटर चित्रांकन का व्यापक उपयोग शुरू हुआ। इस प्रगति ने चलचित्र, वीडियो खेल और एनिमेशन के क्षेत्र में नई दिशा दी, जिससे यह आधुनिक मनोरंजन और तकनीकी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।[1]

कंप्यूटर ग्राफिक्स के मुख्य घटक

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कंप्यूटर ग्राफिक्स के निम्नलिखित प्रमुख घटक हैं:

1. मॉडलिंग

यह प्रक्रिया 2D या 3D वस्तुएं और दृश्य बनाने की होती है, जिसमें उनकी आकृति, आकार और स्थान को एक काल्पनिक स्थान में निर्धारित किया जाता है।

2. रेंडरिंग

यह एक 3D मॉडल से अंतिम छवि तैयार करने की प्रक्रिया है, जिसमें प्रकाश (light), बनावट (texture) और कैमरे की स्थिति को जोड़कर वास्तविकता जैसी छवि बनाई जाती है।

3. एनीमेशन

यह स्थिर चित्रों या मॉडलों में गति ( उत्पन्न करने की प्रक्रिया है, जिससे समय के साथ चलने का भ्रम पैदा किया जाता है।

4. इमेज प्रोसेसिंग

इसमें पहले से मौजूद छवियों (images) को बदलना या संशोधित करना शामिल है, जैसे रंग बदलना, फिल्टर प्रभाव जोड़ना या किनारों को अधिक स्पष्ट बनाना।[2]

सन्दर्भ

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  1. "Computer Graphics | Research Starters | EBSCO Research". EBSCO (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-10-31.
  2. "Computer Graphics and Multimedia: Types, Applications, Job Roles". www.ccbp.in (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2025-10-31.

बाहरी कड़ियाँ

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