औद्योगिक क्रांति के दौरान वस्त्र निर्माण

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विदेशों में बहुत विशाल औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित होने के साथ ही १७ वीं शताब्दी के अंत/१८ वीं शताब्दी के आरंभ में ब्रिटिश साम्राज्य के पास कच्चे माल का बहुत विशाल भण्डार और निर्मित वस्तुओं के लिए बहुत बड़ा औपनिवेशिक बाज़ार उपलब्ध था। माल का निर्माण सीमित पैमाने पर वैयक्तिक कर्मियों द्वारा किया जाता था - जिसका निर्माण वे आमतौर पर अपने परिसरों में (जैसे बुनाई कुटीर में) करते थे - और फ़िर उसे घोड़ों और छ्कड़ों, या नावों द्वारा देश के विभिन्न भागों में ले जया जाता था। कृषि और ढुलाई के लिए ऊर्जा की आपूर्ति खींचने वाले पशुओं द्वारा दी जाती थी।

सैवाओं के लिए बाज़ार तो था, लेकिन उद्योगों का पैमाना; ऊर्जा के स्रोत; और अंतर्देशीय संचार व्यस्था की अवसंरचना की कमी कुछ ऐसी बाधाएँ थी जिनसे पार पाना कठिन था।

इस परिदृश्य में, ब्रिट्श साम्राज्य के लिए औद्योगिक क्रांति के दौरान वस्त्र विनिर्माण को विकसित करने के लिए सेज तैयार हुई।