एरिनावाइरस
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| एरेनावायरस | |
|---|---|
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लिंफोसाइटिक कोरिओमेनिन्जाइटिस विषाणु | |
| विषाणु वर्गीकरण | |
| समूह: | V |
| गण: | हारेविरालेस |
| कुल: | एरेनाविरिडे |
| वंश: | एरेनावायरस |
| जाति: | लिंफोसाइटिक कोरिओमेनिन्जाइटिस विषाणु |
एरेनावायरस (अंग्रेज़ी: Arenavirus) 'एरेनाविरिडे' कुल के आर॰एन॰ए॰ विषाणुओं का एक वंश है। लैटिन भाषा में "एरेना" का अर्थ 'रेत' होता है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इस विषाणु के भीतर मौजूद राइबोसोम रेत के कणों के समान प्रतीत होते हैं, जिसके कारण इसे यह नाम दिया गया है।[1]
यह विषाणु मुख्य रूप से कृन्तकों को संक्रमित करता है। मनुष्यों में यह संक्रमित कृन्तकों के मल-मूत्र या लार के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके संक्रमण से मनुष्यों में 'लासा बुखार' और 'रक्तस्रावी ज्वर' जैसे गंभीर रोग उत्पन्न हो सकते हैं।[2][3] इस वंश की मानक प्रजाति 'लिंफोसाइटिक कोरिओमेनिन्जाइटिस विषाणु' है।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "The C2H2 zinc finger is the classical zinc finger domain". www.quimicaviva.qb.fcen.uba.ar. अभिगमन तिथि: 2026-04-24.
- ↑ "Arenavirus". Microsoft Encarta. मूल से से 19 नवम्बर 2007 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 24 अप्रैल 2026.
- ↑ Pfau, Charles J. (1996), Baron, Samuel (ed.), "Arenaviruses", Medical Microbiology (4th ed.), University of Texas Medical Branch at Galveston, ISBN 978-0-9631172-1-2, पीएमआईडी 21413313, अभिगमन तिथि: 2026-04-24
