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एप्रोटिनिन

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ओषधि एप्रोटिनिन (aprotinin) (ट्रैसिलोल, पूर्व में बायर और अब नॉर्डिक ग्रुप फार्मास्यूटिकल्स) एक एंटीफिब्रिनोलिटिक अणु है जो ट्रिप्सिन और संबंधित प्रोटीयोलाइटिक प्रकिण्व को रोकता है। ट्रसिलोल नाम के साथ एप्रोटिनिन को हृदय और यकृत सर्जरी जैसी जटिल शल्यचिकित्सा के दौरान रक्तस्राव को कम करने के लिए सूई द्वारा दी जाने वाली औषधि के रूप में किया जाता था। इसका मुख्य प्रभाव फाइब्रिनोलिसिस को धीमा करना है, इस प्रक्रिया में रक्त के थक्कों रोकने का कार्य किया जाता है। इसके उपयोग का उद्देश्य शल्यचिकित्सा के दौरान रक्ताधान की आवश्यकता को कम करना था और निम्न रक्तचाप होने वाली क्षति को कम करना था। अध्ययनों से ज्ञात हुआ कि इसके उपयोग से जटिलताओं या मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है जिसके बाद सन् 2007 में विश्वभर में दवा को अस्थायी रूप से वापस ले लिया गया था;[1] आगे के अध्ययनों में इसकी पुष्टि की गई। मई 2008 में बहुत सीमित शोध उपयोग को छोड़कर, ट्रैसिलोल की बिक्री निलंबित कर दी गई थी। फरवरी 2012 में यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) की वैज्ञानिक समिति ने एप्रोटीनिन के बारे में अपने पिछले निर्णय को बदला और निलंबन हटाने की अनुशंसा की।[2] नॉर्डिक सन् 2012 में एप्रोटीनिन का वितरक बन गया।[3]

सन्दर्भ

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  1. Trasylol.com (2007-11-05). Bayer Temporarily Suspends Global Trasylol Marketing. प्रेस रिलीज़. http://www.trasylol.com/Trasylol_11_05_07.pdf. अभिगमन तिथि: 2007-12-03.
  2. "European Medicines Agency recommends lifting suspension of aprotinin". European Medicines Agency. 2012-02-17. मूल से से 2014-02-18 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2012-02-22.
  3. "The Nordic Group acquires rights to Trasylol® from Bayer HealthCare". The Nordic Group B.V. मूल से से 1 फ़रवरी 2014 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 28 जनवरी 2014.