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एपैथोवाइरस

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एफ्थोवायरस

खुरपका-मुँहपका रोग विषाणु का इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी चित्र
विषाणु वर्गीकरण
समूह: IV
गण: पिकोर्नाविरालेस
कुल: पिकोर्नाविरिडे
वंश: एफ्थोवायरस

एफ्थोवायरस (अंग्रेज़ी: Aphthovirus) 'पिकोर्नाविरिडे' कुल के आर॰एन॰ए॰ विषाणुओं का एक वंश है। इसका नाम ग्रीक शब्द "एफ्था" से लिया गया है, जिसका अर्थ 'मुँह के छाले' होता है।

यह विषाणु मुख्य रूप से खुर वाले जानवरों, जैसे— गाय, सुअर, भेड़ और बकरी को संक्रमित करता है। यह पशुओं में होने वाले अति-संक्रामक 'खुरपका-मुँहपका रोग' का प्रमुख कारण है।[1] [2]इस रोगजनक विषाणु के सात प्रमुख सीरोटाइप (A, O, C, SAT 1, SAT 2, SAT 3 और Asia 1) होते हैं।

संरचनात्मक रूप से, एफ्थोवायरस आवरणहीन और आइकोसाहेड्रल होते हैं। इनका जीनोम एकल-रज्जुक सकारात्मक आर॰एन॰ए॰ का बना होता है। इनकी प्रतिकृति कोशिकाद्रव्य में होती है और ये संक्रमण के बाद कोशिका को नष्ट करके बाहर निकलते हैं।

सन्दर्भ

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  1. Martinez-Salas; et al. (2008). "Foot-and-Mouth Disease Virus". Animal Viruses: Molecular Biology. Caister Academic Press. ISBN 978-1-904455-22-6.
  2. "Animal Viruses: Molecular Biology". www.caister.com (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-04-24.