उष्ण वाताग्र
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उष्ण (अथवा ऊष्ण) वाताग्र, मौसम विज्ञान एवं जलवायु विज्ञान में, वाताग्रों के प्रकार के रूप में वर्णित किये जाते हैं, जो ऐसी ढलुवाँ सतह होते हैं जिनके सहारे दो भिन्न लक्षणों वाली वायुराशियाँ एक दूसरे से मिलती (या अलग चिह्नित) होती हैं।[1][2] उष्ण वाताग्र की दशा में अपेक्षाकृत रूप से गर्म और हलकी वायु का अभिसरण ठंडी और भारी हवा के ऊपर होता है। दूसरे शब्दों में - जब गर्म वायु राशियाँ तेज़ी से ठंडी वायुराशियों के ऊपर स्थापित होती हैं तो उष्ण वाताग्र का निर्माण होता है।
यह बिभाजक सतह कोई रेखा नहीं बल्कि एक संक्रमण क्षेत्र होता है और पृथ्वीतल पर ऊर्ध्वाधर न होकर झुका हुआ होता है। मध्य अक्षांशों में उष्ण वताग्र की ढ़ाल प्रवणता (यानि झुकाव) 1:100 से 1:400 तक होती है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Garg 2021, p. 84.
- ↑ Laju & Prasetyo, p. 102.
स्रोत ग्रंथ
[संपादित करें]- Garg, Dr H. S. (3 Dec 2021). जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान Climatology And Oceanography - SBPD Publications (HIndi). SBPD Publications. अभिगमन तिथि: 8 Apr 2025.
- Laju, I. Kadek; Prasetyo, Anugrah Nur. Meteorology. PIP Semarang. ISBN 978-623-8141-21-0. अभिगमन तिथि: 8 Apr 2025.
- Singh, Dr Abha (20 Apr 2022). भौतिक भूगोल (Bhautik Bhugol - Physical Geography) according to Minimum Uniform Syllabus Prescribed by National Education Policy [NEP 2020] for B. A. Semester - I. SBPD Publications. अभिगमन तिथि: 8 Apr 2025.
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