उदयपुर के स्वरूप सिंह

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डांगरी डांगरी फतेहगढ उपख्ण्ड मुख्यालय से २१ किमी दूर जैसलमेर जिले में है। डांगरी ग्रामपंचायत हैं जिसके अंतर्गत ५ गांव है। डांगरी का इतिहास पूर्व जैसलमेर राज्य के राजनीतिक में महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। डांगरी आजाद भारत से पूर्व राजपूताना के बड़े ठिकानों में से एक है और बिहारीदासोत भाटी का बड़ा ठिकाना हैं हुआ करता था डांगरी। यहाँ के भाटी ठाकुरों के वंशज ही थे। जिन्होंने जैसलमेर कि स्थापना की थी। डांगरी ठाकुर एक समय जैसलमेर राजगद्दी के वारिस हुआ करते पूर्व जैसलमेर महारावल कि अकाल मृत्यु ओर सडयंन्त्र के कारण जैसलमेर त्यागना पड़ा डांगरी को अपना ठिकाना बनाया ओर यहाँ रहने आये लोगों के सेवा में अपना जीवन समर्पित किया। इसके बावजूद भी इनका रुझान हमेशा जैसलमेर की राजनीति में रहा। यही कारण है कि जैसलमेर त्याग के बाद भी इन्होंने जैसलमेर को बहुत कुछ दिया है। डांगरी ठाकुर लालसिहं जैसलमेर सेनापति तथा राजनीतिकज्ञ तथा उच्च दरबारी थे।