उत्पलकुमार बसु

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उत्पल कुमार बसु (३ अगस्त १९३९) (উৎপলকুমার বসু) बांग्ला सहित्य के भूखी पीढ़ी (हंगरी जनरेशन) आन्दोलन के एक प्रमुख कवि हैं। १९६० तक वह कृत्तिवास गोष्ठी के सदस्य थे। भुखी पीढी आन्दोलन में योगदान के कारण उनके खिलाफ भी कोलकाता पुलिस समन निकाला था। इसके चलते उन्हे योगमाया देवी कालेज के प्राध्यापक के नौकरि से बरखास्त किया गया था। ततपश्चात वह विदेश चले गये एवम दस साल के लिये कविता लिखना त्याग दिया। दस साल बाद कोलकाता लौट कर उन्होने जो कवितायें प्रकाश करने लगे, साहित्य जगत में मानो तहलका मचा दिया। भुखी पीढी आन्दोलन के समय लिखे उनका पोपेर समाधि को सराहा गया है।

कृतियां[संपादित करें]

  • चैत्रे रचितो कविता (१९६१)
  • पुरी सिरिज (१९६४)
  • आबार पुरी सिरिज (१९७८)
  • लोचनदास कारिगर (१९८२)
  • खन्डोबैचित्रेर दिन (१९८६)
  • श्रेष्ठो कविता (१९९१)
  • सलमाजोरिर काज (१९९५)
  • पोद्योसंग्रह (१९९६)
  • कवितासंग्रह (१९९६)
  • कहोबोतीर नाच (१९९७)
  • नाइटस्कुल (१९९९)
  • टुसु आमार चिन्ह्तामोणि (२०००)


सन्दर्भ[संपादित करें]

  • योगसूत्र उतपलकुमार बसु संख्या (१९९४)। विनय घोष सम्पादित। विश्लेषक्गण: तरुण बन्दोपध्याय, जोगेन चौधुरी, प्रशान्तो माझि, अलोकरंजन दाशगुप्ता, मिहिर चक्रबोर्ती, राघव बन्दोपध्याय, बीरेन्द्रोनाथ रक्षित, उपल दत्तोगुप्ता, गौतम बसु, चैताली चट्टोपाध्याय, कालीकृष्ण गुहा एवम रंजन बन्दोपाध्याय।
चित्र:Hungry Generation - News paper Article Malay Roy Choudhury.jpg
समीर रायचौधुरी एवम मलय रायचौधुरी के साथ कोलकाता में उत्पलकुमर बसु

इन्हें भी देखें[संपादित करें]


बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]