इस्माईल प्रथम
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| इस्माइल प्रथम | |||||||||
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| ईरान के शाह | |||||||||
| शासनावधि | 22 दिसंबर 1501 – 23 मई 1524 | ||||||||
| उत्तरवर्ती | तहमास्प प्रथम | ||||||||
| वज़ीर | |||||||||
| सफ़विया के 8वें शेख़ | |||||||||
| In office 1494 – 23 मई 1524 | |||||||||
| पूर्वाधिकारी | अली मिर्ज़ा सफ़वी | ||||||||
| उत्तराधिकारी | तहमास्प प्रथम | ||||||||
| जन्म | 17 जुलाई 1487 अर्दाबील, अक़ क़ोयुनलू | ||||||||
| निधन | 23 मई 1524 (उम्र 36 वर्ष) तबरेज़, सफ़वी ईरान | ||||||||
| समाधि | शेख़ सफ़ी मक़बरा, अर्दाबील, ईरान | ||||||||
| जीवनसंगी | ताजलू ख़ानम बहरोज़ा ख़ानम | ||||||||
| संतान अन्य | तहमास्प प्रथम साम मिर्ज़ा अलक़ास मिर्ज़ा बहराम मिर्ज़ा परी ख़ान ख़ानम महीनबानो ख़ानम | ||||||||
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| राजवंश | सफ़वी | ||||||||
| पिता | शेख़ हैदर | ||||||||
| माता | आलमशाह हलीमा बेगम | ||||||||
| धर्म | शिया इस्लाम | ||||||||
| हस्ताक्षर | |||||||||
इस्माइल प्रथम (फ़ारसी: اسماعیل یکم; 17 जुलाई 1487 – 23 मई 1524) ईरान के सफ़वी वंश का प्रथम शासक था जिसने ईरान पर शासन किया। उसके शाह बनने के समय वो सिर्फ़ 14 साल का था और उसे उसके विरोधियों के साथ किए क्रूर कृत्यों के लिए भी जाना जाता है। इसके पहले सफ़वी वंश उत्तर-पश्चिमी ईरान में एक सीमित संगठन था। १५०१ में इस्माइल ने तबरेज़ पर अधिकार कर लिया और ख़ुद को शाह घोषित कर दिया। उसके पिता शिया बने थे, हाँलांकि उसके पूर्वज सुन्नी और सूफ़ी थे। उसने शिया इस्लाम को पहली बार सैनिक और कठोर रूप दिया। उसके बाद से ईरान संपूर्ण रूप से शिया बन गया और आज तक है। उसने अपनी प्रजा पर प्रथम शिया इमाम अली, जिनको सुन्नी चौथे ख़लीफ़ा के रूप में मानते हैं, के पहले के तीन ख़लीफ़ाओं को गाली देने की प्रथा चलाई। हाँलांकि ईरान में शिया सहानूभूति सदियों से थी पर उसको ही ईरान को मुख्य रूप से शिया बनाने के श्रेय दिया जाता है क्योंकि उसी के शासन काल में शिया मुस्लिम सदियों के बाद पहली बार सामरिक रूप से सबल और स्थापित हो सके थे।
वो एक कवि भी था और उसको अज़रबैजानी भाषा के साहित्य में सम्माननीय स्थान मिला हुआ है। वो ख़ताई (पाप करने वाला) के नाम से लिखता था।
शासन
[संपादित करें]1501 में अपने पिता की मृत्यु के बाद, जब वो सिर्फ़ 14 साल का था उसने तबरेज़ पर अधिकार कर लिया। उसने शिया इस्लाम को राजधर्म बनाने का संकल्प लिया। तबरेज़ और पूर्वी अनातोलिया में उसके कई समर्थक बने। उज़्बेको के विद्रोह को दबाने के लिए वो उत्तर पूर्व की तरफ़ गया जहाँ मुहम्मद शायबानी को मारने के बाद उसके सर को उसने एक प्याले के रूप में बनाया। दो और विद्रोहियों को पकड़ने के बाद उनके शव को कबाब के रूप में भुनवा कर उसने अपने समर्थकों को उसे खान को कहा। अनातोलिया के पूर्व में अपने साम्राज्य में शिया इस्लाम का समर्थक देख उस्मानी तुर्कों ने इस्माइल के राज्य पर आक्रमण किया। चल्दिरान की लड़ाई में उसकी हार हुई जिसमें तुर्कों ने तोपों और बारूद का इस्तेमाल किया था। इसके बाद वो शराबी बन गया और 36 साल की आयु में उसकी मौत हो गई।
- ↑ Mahir, Banu (2009). "Album H.2169 in the Topkapi Palace Museum Library (p.465-)". In Géza, Dávid; Ibolya, Gerelyes (eds.). Thirteenth International Congress of Turkish Art: Proceedings (अंग्रेज़ी भाषा में). Hungarian National Museum. pp. 471, 476. ISBN 978-963-7061-65-3.
The image is of Shah Ismail I, and the note at the bottom edge ('Kalem-i şikeste-i fakir Behzad') identifies the drawing as the copy of an original by Bihzad
- ↑ Afyoncu, Erhan (2010). Yavuz'un küpesi. İstanbul: Yeditepe. ISBN 978-605-4052-35-6.
Şah Ismail (TSMK, nr. Hazine 2169, vr. 64b)
- ↑ Necipoğlu, Gülru (1 January 2000). Word and Image: The Serial Portraits of Ottoman Sultans in Comparative Perspective. p. 52.
Copy of a seated portrait of Shah Isma'il I from a lost original, ascribed to Bihzad, undated, Istanbul, Topkapı Sarayı Müzesi, H. 2169, fol. 64v