आवेग (मनोविज्ञान)

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मनोविज्ञान में, आवेग मनमर्जी से कार्य की प्रवृत्ति है, जिसमें बहुत कम या बिना किसी पूर्वचिन्ता, प्रतिबिम्ब या परिणामों पर विचार किए व्यवहार प्रदर्शित करा जाता है। [1] आवेगपूर्ण कार्य साधारणतः "खराब ढंग से चिन्तित, समय से पूर्व व्यक्त, अनुचित रूप से जोखिम भरे, या स्थिति हेतु अनुपयुक्त होते हैं जिनके फलस्वरूप अक्सर अवांछनीय परिणाम होते हैं," [2] जो साफल्य हेतु दीर्घकालिक लक्ष्यों और नीतियों को खतरे में डालते हैं। [3] आवेग को बहुकारकीय निर्माण के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। [4] आवेग की एक कार्यात्मक वैविध्य का भी प्रस्तावित है, जिसमें उचित परिस्थितियों में बिना अधिक पूर्वचिन्तित कार्य शामिल है जिसके फलस्वरूप वांछनीय परिणाम हो सकते हैं। "जब ऐसे कार्यों के सकारात्मक परिणाम होते हैं, तो उन्हें आवेग के संकेत के रूप में नहीं देखा जाता है, बल्कि धार्ष्ट्य, त्वरा, सहजता, साहस या अपरंपरागतता के संकेतक के रूप में देखा जाता है।" [2] [5] इस प्रकार, आवेग के निर्माण में कम से कम दो स्वतन्त्र घटक शामिल होते हैं: प्रथम, उचित मात्रा में विचार-विमर्श के बिना कार्यान्वयन, [2] जो कार्यात्मक हो भी सकता है और नहीं भी; और द्वितीय, दीर्घकालिक लाभ के बजाय अल्पकालिक लाभ को चुनना । [6]

कई क्रियाओं में आवेगिक और बाध्य दोनों विशेषताएँ होती हैं, किन्तु आवेग और बाध्यता कार्यात्मक रूप से भिन्न होती हैं। आवेग और बाध्यता इस मायने में परस्पर संबंधित हैं कि प्रत्येक समय से पहले या बिना पूर्वचिन्तित कार्य की प्रवृत्ति प्रदर्शित करता है और इसमें अक्सर नकारात्मक परिणाम शामिल होते हैं। [7] बाध्यता एक निरन्तरता पर हो सकती है जिसमें एक छोर पर बाध्यता और दूसरे छोर पर आवेग है, किन्तु इस बिन्दु पर शोध विरोधाभासी रहा है। [8] बाध्यता किसी कथित जोखिम या संकट की प्रतिक्रिया में होती है, आवेग किसी कथित तात्कालिक लाभ या लाभ की प्रतिक्रिया में होती है, [7] और, जबकि बाध्यता में पुनरावृत्त कार्य शामिल होते हैं, आवेग में अनियोजित प्रतिक्रियाएँ शामिल होती हैं।

द्यूत और मद्यव्यसन की स्थितियों में आवेग एक सामान्य विशेषता है। शोध से ज्ञात है कि इनमें से किसी भी व्यसन से ग्रस्त व्यक्ति विलम्बित धन पर उन लोगों की तुलना में अधिक दरों पर छूट देते हैं, और द्यूत और मद्यव्यसन की उपस्थिति से छूट पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ता है। [9]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. VandenBos, G. R. (2007). APA dictionary of psychology. Washington, DC: APA. पृ॰ 470. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9781591473800.
  2. Daruna, J. H.; Barnes, P. A. (1993). "A neurodevelopmental view of impulsivity". प्रकाशित McCown, William George; Johnson, Judith L.; Shure, Myrna B. (संपा॰). The Impulsive Client: Theory, Research, and Treatment. Washington, DC: American Psychological Association. पपृ॰ 23–37. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-55798-208-7. डीओआइ:10.1037/10500-002.
  3. Madden, Gregory J.; Johnson, Patrick S. (2010). "A Delay-Discounting Primer". प्रकाशित Madden, Gregory Jude; Bickel, Warren K. (संपा॰). Impulsivity: The Behavioral and Neurological Science of Discounting. Washington, DC: American Psychological Association. पपृ॰ 11–37. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-4338-0477-9.
  4. (वीर गडरिया) पाल बघेल धनगर
  5. (वीर गडरिया) पाल बघेल धनगर
  6. Rachlin, Howard (2000). "Self-Control as an Abstraction of Environmental Feedback". The Science of Self-Control. Cambridge, MA: Harvard University Press. पृ॰ 183. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-674-00093-3.
  7. (वीर गडरिया) पाल बघेल धनगर
  8. (वीर गडरिया) पाल बघेल धनगर
  9. (वीर गडरिया) पाल बघेल धनगर