अल्फ्रेड टेनिसन

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लॉर्ड टेनिसन

अल्फ्रेड, लार्ड टेनिसन (Alfred Tennyson, 1st Baron Tennyson, FRS ; 6 अगस्त 1809 – 6 अक्टूबर 1892) की गणना अंग्रेजी साहित्य के महाकवियों में की जाती है। रानी विक्टोरिया के राज्यकाल के अधिकांश अवधि में वे ग्रेट ब्रिटेन तथा आयरलैण्ड के राजकवि (Poet Laureate) थे।[1]

परिचय[संपादित करें]

टेनिसन का जन्म ६ अगस्त, १८०९ को समरस्बी, लिंकनशायर (इंग्लैंड) में हुआ। आपके पिता देहात के एक गिरजे के पादरी थे जहाँ के प्रकृतिप्रधान ग्रामीण वातावरण में आपका बचपन व्यतीत हुआ। इससे आपकी काव्यप्रतिभा बचपन में ही अंकुरित हो उठी। विद्याध्ययन के लिए ट्रिनिटी कालेज, केंब्रिज में भरती होने से दो वर्ष पहले ही आपका पहला काव्यसंग्रह १८२७ ई० में प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में आपके बड़े भाई, चार्ल्स की भी कुछ कविताएँ सम्मिलित थीं और इसका नाम 'पोएम्स बाई टू ब्रदर्स', था। १८२९ में आपको 'टिंबकटू' शीर्षक अतुकांत कविता लिखने पर अपने विश्वविद्यालय का चांसलर पदक प्राप्त हुआ। वर्ष भर बाद आपके गीतों की एक पुस्तक प्रकाशित हुई। १८३१ ई. में अपने पिता की मृत्यु हो जाने के बाद विश्वविद्यालय की पढ़ाई, परीक्षा की डिग्री प्राप्त किए बिना आपने छोड़ दी और साठ बरस तक निरंतर काव्यसाधना में लगे रहे। १८३२ ई० में आपका ऐक और कवितासंग्रह प्रकाशित हुआ जो लोकप्रिय हुआ।

१८३३ ई. में अपने घनिष्ट मित्र आर्थर हेलेम की आकस्मिक मृत्यु से आपका चित्त बहुत विचलित हो उठा और आपकी काव्य साधना ने एक नया मोड़ लिया। आपकी गणना अब विक्टोरिया युग के प्रतिनिधि कवियों में होने लगी। आपने मित्र की स्मृति में 'इन मेमोरियम' शीर्षक आपकी रचना १८५० ई० में प्रकाशित हुई जो १९वीं शताब्दी की प्रतिनिधि रचना मानी जाती है। इसी वर्ष आपने कुमारी एमिली सेलवुट से विवाह किया और महाकवि वर्ड्सवर्थ की मृत्यु हो जाने पर इसी वर्ष आप इंग्लैंड के 'पोएट लारिएट' (राजकवि) पद पर प्रतिष्ठित किए गए। राजकवि के रूप में आपकी पहली रचना 'ओड आन दि डेथ ऑव दि ड्यूक ऑव विर्लिगटन' १८५२ ई. में प्रकाशित हुई जो ओज, लय और देशभक्ति से ओतप्रोत भावों के लिए बहुत प्रशंसित हुई। इसके बाद आपकी अन्य रचनाएँ 'माड', 'इडिल्स ऑव दि किंग', 'एनक आर्डेन' आदि समय समय पर प्रकाशित होनी रहीं और अत्यंत लोकप्रिय हुई। १८८३ में आप 'लार्ड' की उपाधि से विभूषित किए गए। नौ वर्ष बाद ६ अक्टूबर, १८९२ ई. को आपकी मृत्यु हो गई।

आपकी कविता में माधुर्य, और प्रसाद गुणों का समावेश है। सरल और लयपूर्ण पदावली आपकी कविता की विशेषता है और वह धार्मिक आस्था से ओतप्रात है। उसमें दार्शनिक भावों का घटाटोप नहीं मिलता और न उसमें व्यवस्थित समाज के प्रति विद्रोह की भावना ही पाई जाती है। आपकी कविता ने ब्रिटिश विचारों और भावनाओं को बहुत प्रभावित किया।

सन्दर्भ[संपादित करें]