अर्थशास्त्र के प्रमुख सिद्धान्त

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ

अर्थशास्त्र, उपयोगिता की विद्या है। उपयोगिता के अन्तर्गत लोगों की प्राथमिकता (पसन्द), वस्तुओं से मिलने वाली संतुष्टि, वस्तुओं को लोगों द्वारा प्रदत्त महत्व आदि आते हैं। इच्छाएँ अनन्त हैं और इसके साथ यह भी सत्य है कि एक ही वस्तु की अधिकाधिक मात्रा मिलने पर लोगों को उससे क्रमश: न्यून-से-न्यूनतर लाभ या संतुष्टि मिलती है। (ह्रासमान उपयोगिता का नियम)

अर्थशास्त्र के कुछ प्रमुख नियम निम्नवत् हैं -

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]