सामग्री पर जाएँ

अब्दुल हलिम शरार

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Abdul Halim Sharar
जन्म
Abdul Halim Sharar

04 सितम्बर 1860
निधन1 दिसम्बर 1926(1926-12-01) (उम्र 66 वर्ष)
पेशाNovelist, poet, essayist, historian, playwright
राष्ट्रीयताIndian
कालखंड1885–1926
विधाDrama, nonfiction, history, personal correspondence
उल्लेखनीय कृतियाँFirdaus-e-Bareen; Zawāl-e-Baghdad; Husn kā Daku; Darbar-e-Harampur; Guzishta Lucknow

अब्दुल हलिम शरार ( उर्दू: عبدالحلیم شرر  ; ४ सितंबर १८६० - १ दिसंबर १९२६) [1] [2] लखनऊ के एक भारतीय लेखक, नाटककार, निबंधकार और इतिहासकार थे। उनकी लगभग 102 किताबें हैं। उन्होंने अक्सर इस्लामी अतीत के बारे में लिखा और साहस, बहादुरी, उदारता और धार्मिक उत्साह जैसे गुणों को सराहो। मलिकुल अज़िया वर्जिना (1889), फिरदौस-ए-बरीन (1899), ज़वाल-ए-बगदाद (1912), हुस्न का डाकू (1913-1914), दरबार-ए-हरमपुर (1914) और फतेह मफतुह (1916) उनके कुछ प्रसिद्ध उपन्यासों हैं।

 

  1. "Abdul Halim Sharar biography" (PDF). columbia.edu. अभिगमन तिथि: 1 January 2013.
  2. Sheldon I. Pollock (2003). Literary Culture in History: Reconstructions from South Asia. University of California Press. p. 881. ISBN 978-0-520-22821-4.