अन्वीक्षा

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अन्वीक्षा (inquest) विशेषतः उस न्यायिक जाँच को कहते हैं जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए की जाती हे।

अन्वीक्षा ३ प्रकार की होती है:

  • पुलिस अन्वीक्षा
  • मजिस्ट्रेट अन्वीक्षा
  • मृत्यु अन्वीक्षक या कोरोनेर्स इन्क़ुएस्त

भारत मे २ ही तरह की अन्वीक्षा होती है

  • पुलिस अन्वीक्षा
  • मजिस्ट्रेट अन्वीक्षा

मृत्यु समीक्षक या कोरोनेर्स इन्क़ुएस्त U.K मे और कुछ USA के राज्यों मै होती है पर इंडिया मै नही होती।

पुलिस इन्क़ुएस्त[संपादित करें]

पुलिस थाने के उप निरीक्षक (sub-inspector) इन्क़ुएस्त करता है। यह Cr.P.C, sec 174 मै लिखा है। जब भी पुलिस को जानकारी मिलती है की मृत्यु हुए है तो जल्दी ही नजदीकी मजिस्ट्रेट को सूचित कर के जाच-पड़ताल के लिए निकल जाता है। पुलिस इन्क़ुएस्त कर सकता है जो मृत्यु हुए है:

  • आत्महत्या करने से
  • किसी के खून करने से
  • किसी जानवर से मारे जाने से
  • एक्सीडेंट से

उप निरीक्षक जल्दी ही शरीर को देखता है और दो आदरकारी व्यक्ति के आगे रिपोर्ट बनता है और उनके हस्ताक्षर उस रिपोर्ट पर लेता है (sec175, Cr.P.C)। शरीर की जाँच करता है की कोई चोट है या नही या कोई हथियार है या नही। जाँच के बाद शरीर रिश्तेदारों को दे दी जाता है।

मजिस्ट्रेट इन्क़ुएस्त[संपादित करें]

जिला मजिस्ट्रेट, उप प्रभागीय मजिस्ट्रेट या तहसीलदार कोई भी इन्क़ुएस्त कर सकता है। यह Cr.P.C, sec 20 to 23 मै लिखा है। मगिस्त्ररते इन्क़ुएस्त कर सकता है इन मामलो मै:

  • मृत्यु होना पुलिस की हिरासत मै
  • पुलिस गोलीबारी मै मृत्यु होना
  • जेल मै मृत्यु होना
  • अस्पताल या पागल खाने मै मृत्यु होना
  • दहेज के करन मृत्यु

कोरोनेर्स इन्क़ुएस्त[संपादित करें]

मृत्यु समीक्षक या कोरोनेर्स इन्क़ुएस्त U.K मे और कुछ USA के राज्यों मै होती है पर इंडिया मै नही होती। कॉरोनर इन्क़ुएस्त करता है अस्वाभाविक और संदेहजनक मृत्यु मै।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • [Anon.] (2001) "Inquest", Encyclopaedia Britannica, Deluxe CDROM edition