अनौपचारिक शिक्षा

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अनियमित शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षा कहा जाता है। इस तरह की शिक्षा में किसी चीज की निश्चितता नहीं होती है। इसलिए इसे आकस्मिक और अनियोजित शिक्षा भी कहा जाता है। यह स्वभाविक या प्राकृतिक रूप से होती है। यह शिक्षा पूर्वविचारित नहीं होती है। बालक इसे अपने परिवार के अन्दर और आस-पड़ोस, खेल के मैदान, पार्क आदि जैसे खुले वातावरण में सार्वजनिक जगहों पर, उठते-बैठते, खेलते-कूदले, बात-चीत करके स्वाभाविक रूप से स्वतंत्रतापूर्वक ग्रहण करता है। यह पत्राचार, सम्पर्क कार्यक्रमों, जन संचार के साधनों द्वारा शिक्षा प्रदान की जाती हैं। इसके लक्ष्य और उद्देश्य निश्चित नहीं होते हैं और न ही कोई निश्चित पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तक, शिक्षण विधि या समय-सारणी होती है। यह शिक्षा जन्म से लेकर मृत्यु तक निर्बाध रूप से लगातार चलती रहती है। यह शिक्षा जीवन के प्रत्येक अनुभव से प्राप्त की जाती है। अनौपचारिक शिक्षा के प्रमुख साधन-परिवार, समुदाय, मित्र-मंडली, धर्म, समाज, खेल का मैदान, प्रकृति इत्यादि।[1]

प्रमुख शिक्षा पद्धति प्रमुख शिक्षा पद्धति
औपचारिक शिक्षा | अनौपचारिक शिक्षा | निरौपचारिक शिक्षा
  1. "औपचारिक शिक्षा । अनौपचारिक शिक्षा । निरौपचारिक शिक्षा". अभिगमन तिथि 2020-10-04.