अंतर्पाठ

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अंतर्पाठ (intertextuality या intertext) किसी एक लिखाई या पाठ के अर्थ को किसी दूसरे पाठ द्वारा निर्धारित या परिवर्तित करने को कहते हैं। अंतर्पाठ का प्रयोग पाठक को प्रभावित करने के लिये और पाठ्य सामग्री में अर्थों की गहराई बढ़ाने के लिये करा जाता है।[1][2][3][4]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Agger, Gunhild Intertextuality Revisited: Dialogues and Negotiations in Media Studies. Canadian Journal of Aesthetics, 4, 1999.
  2. Fahnestock, Jeanne. "Accommodating Science: The Rhetorical life of Scientific Facts," Written Communication, 3(3), 1986, 275-296.
  3. Fairclough, Norman. Analysing Discourse: Textual Analysis for Social Research. New York: Routledge, 2003.
  4. Griffig, Thomas. Intertextualität in linguistischen Fachaufsätzen des Englischen und Deutschen (Intertextuality in English and German Linguistic Research Articles). Frankfurt a.M. et al.: Lang, 2006.