हिन्दी व्याकरण

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व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा किसी भाषा का शुद्ध बोलना, शुद्ध पढ़ना और शुद्ध लिखना आता है। किसी भी विकसित भाषा के लिखने, पढ़ने और बोलने के निश्चित नियम होते हैं भाषा की शुद्धता व सुंदरता को बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ये नियम भी व्याकरण के अंतर्गत आते हैं। व्याकरण भाषा के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसे भाषा विज्ञान कहते हैं। यह लेख हिन्दी भाषा के व्याकरण के विषय में है।

भाषा विज्ञान के तीन महत्वपूर्ण भाग होते हैं:

  • वर्ण विभाग- इसमें अक्षरों या वर्णों से संबंधित नियमों का ज्ञान होता है।
  • शब्द विभाग- इसमें शब्दों के भेद आदि बताए जाते हैं।
  • वाक्य विभाग- इसमें वाक्य रचना के नियमों का वर्णन होता है।


अनुक्रम

[संपादित करें] वर्ण विभाग

मुख्य लेख: वर्ण विभाग

वर्ण विभाग में वर्णमाला अर्थात स्वरों व व्यंजनों के विषय में जानकारी होती है। हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी वर्णमाला में कुल 52 अक्षर हैं, जिनमें से 16 स्वर हैं और 36 व्यंजन।

[संपादित करें] स्वर

  • अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ॠ ऌ ॡ

(हिंदी में ॠ ऌ ॡ का प्रयोग प्रायः नहीं होता।)

[संपादित करें] व्यंजन

  • क ख ग घ ङ
  • च छ ज झ ञ
  • ट ठ ड ढ ण
  • त थ द ध न
  • प फ ब भ म
  • य र ल व
  • श ष स ह
  • क्ष त्र ज्ञ

[संपादित करें] शब्द विभाग

मुख्य लेख: शब्द और उसके भेद

अक्षरों के समूह को, जिसका कि कोई अर्थ निकलता है, शब्द कहते हैं। उदाहरण के लिए क, म तथा ल के मेल से 'कमल' बनता है तथा इसका अर्थ भी निकलता है अतः 'कमल' एक शब्द है किन्तु 'लकम' भी इन्हीं तीनों अक्षरों के मेल से बनता है पर उसका कुछ भी अर्थ नहीं निकलने के कारण वह शब्द नहीं है।

व्याकरण के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं- विकारी और अविकारी या अव्यय। विकारी शब्दों को चार भागों में बाँटा गया है- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। अविकारी शब्द या अव्यय भी चार प्रकार के होते हैं- क्रिया विशेषण, संबंध बोधक, संयोजक और विस्मयादि बोधक इस प्रकार सब मिलाकर निम्नलिखित 8 प्रकार के शब्द-भेद होते हैं:

[संपादित करें] संज्ञा

मुख्य लेख: संज्ञा और उसके भेद

किसी भी नाम बताने वाले शब्द को संज्ञा कहते हैं। उदाहरण -

राम, भारत, हिमालय, गंगा, मेज, कुर्सी, बिस्तर, चादर, शेर, भालू, साँप, बिच्छू आदि।

[संपादित करें] सर्वनाम

मुख्य लेख: सर्वनाम और उसके भेद

संज्ञा के बदले में आने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं। उदाहरण -

मैं, तू, तुम, आप, वह, वे आदि।

[संपादित करें] विशेषण

मुख्य लेख: विशेषण और उसके भेद

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं। उदाहरण -

'हिमालय एक विशाल पर्वत है।' यहाँ "विशाल" शब्द "हिमालय" की विशेषता बताता है इसलिये वह विशेषण है।

[संपादित करें] क्रिया

मुख्य लेख: क्रिया और उसके भेद

कार्य का बोध कराने वाले शब्द को क्रिया कहते हैं। उदाहरण -

आना, जाना, होना, पढ़ना, लिखना, रोना, हसना, गाना आदि।

[संपादित करें] क्रिया विशेषण

मुख्य लेख: क्रिया विशेषण और उसके भेद

किसी भी क्रिया, विशेषण या क्रिया विशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द को क्रिया विशेषण कहते हैं। उदाहरण -

'मोहन मुरली की अपेक्षा कम पढ़ता है।' यहाँ "कम" शब्द "पढ़ने" (क्रिया) की विशेषता बताता है इसलिये वह क्रिया विशेषण है।
'मोहन बहुत अच्छा विद्यार्थी है।' यहाँ "बहुत" शब्द "अच्छा" (विशेषण) की विशेषता बताता है इसलिये वह क्रिया विशेषण है।
'मोहन मुरली की अपेक्षा बहुत कम पढ़ता है।' यहाँ "बहुत" शब्द "कम" (क्रिया विशेषण) की विशेषता बताता है इसलिये वह क्रिया विशेषण है।

[संपादित करें] संबंध बोधक

मुख्य लेख: संबंध बोधक

दो वस्तुओं के मध्य सम्बंध बताने वाले शब्द को सम्बंधकारक कहते हैं। उदाहरण -

'यह मोहन की पुस्तक है।' यहाँ "की" शब्द "मोहन" और "पुस्तक" में सम्बंध बताता है इसलिये यह सम्बंधकारक है।

[संपादित करें] समुच्चय बोधक

मुख्य लेख: समुच्चय बोधक

दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने वाले संयोजक शब्द को समुच्चय बोधक कहते हैं। उदाहरण -

'मोहन और सोहन एक ही शाला में पढ़ते हैं।' यहाँ "और" शब्द "मोहन" तथा "सोहन" को आपस में जोड़ता है इसलिये यह संयोजक है।
'मोहन या सोहन में से कोई एक ही कक्षा कप्तान बनेगा।' यहाँ "या" शब्द "मोहन" तथा "सोहन" को आपस में जोड़ता है इसलिये यह संयोजक है।

[संपादित करें] विस्मयादि बोधक

मुख्य लेख: विस्मयादि बोधक

विस्मय प्रकट करने वाले शब्द को विस्मायादिबोधक कहते हैं। उदाहरण -

अरे! मैं तो भूल ही गया था कि आज मेरा जन्म दिन है। यहाँ "अरे" शब्द से विस्मय का बोध होता है अतः यह विस्मयादिबोधक है।

[संपादित करें] वाक्य विभाग

मुख्य लेख: वाक्य और वाक्य के भेद

शब्दों के समूह को जिसका पूरा पूरा अर्थ निकलता है, वाक्य कहते हैं। वाक्य के दो अनिवार्य तत्त्व होते हैं-

१- उद्देश्य और
२- विधेय

जिसके बारे में बात की जाय उसे उद्देश्य कहते हैं और जो बात की जाय उसे विधेय कहते हैं। उदाहरण के लिए मोहन प्रयाग में रहता है। इसमें उद्देश्य- मोहन है, और विधेय है- प्रयाग में रहता है। वाक्य भेद दो प्रकार से किए जा सकते हँ-

१- अर्थ के आधार पर वाक्य भेद
२- रचना के आधार पर वाक्य भेद

अर्थ के आधार पर आठ प्रकार के वाक्य होते हँ- १-विधान वाचक वाक्य, २- निषेधवाचक वाक्य, ३- प्रश्नवाचक वाक्य, ४- विस्म्यादिवाचक वाक्य, ५- आज्ञावाचक वाक्य, ६- इच्छावाचक वाक्य, ७- संदेहवाचक वाक्य।

[संपादित करें] काल

मुख्य लेख: काल और काल के भेद

वाक्य तीन काल में से किसी एक में हो सकते हैं:

  • वर्तमान काल जैसे मैं खेलने जा रहा हूँ।
  • भूतकाल जैसे 'जय हिन्द' का नारा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने दिया था और
  • भविष्य काल जैसे अगले मंगलवार को मैं नानी के घर जाउँगा।

वर्तमान काल के तीन भेद होते हैं- सामान्य वर्तमान काल, संदिग्ध वर्तमानकाल तथा अपूर्ण वर्तमान काल। भूतकाल के फिर से छे भेद होते हैं समान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत, संदिग्ध भूत और हेतुमद भूत। भविष्य काल के दो भेद होते हैं- सामान्य भविष्यकाल और संभाव्य भविष्यकाल।

[संपादित करें] पुरुष

  एकवचन बहुवचन
उत्तम पुरुष मैं हम
मध्यम पुरुष तू / तुम तुम लोग / तुम सब
अन्य पुरुष यह ये
वह वे / वे लोग
आप आप लोग / आप सब

हिन्दी में तीन पुरुष होते हैं-

  • उत्तम पुरुष-

मैं, हम

  • मध्यम पुरुष -

तुम, आप

  • अन्य पुरुष-

वह, राम आदि

[संपादित करें] वचन

हिन्दी में दो वचन होते हैं:

  • एकवचन- जैसे राम, मैं, काला, आदि एकवचन में हैं।
  • बहुवचन- हम लोग, वे लोग, सारे प्राणी, पेड़ों आदि बहुवचन में हैं।

[संपादित करें] लिंग

हिन्दी में सिर्फ़ दो ही लिंग होते हैं: स्त्रीलिंग और पुल्लिंग। कोई वस्तु या जानवर या वनस्पति या भाववाचक संज्ञा स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग, इसका ज्ञान अभ्यास से होता है। कभी-कभी संज्ञा के अन्त-स्वर से भी इसका पता चल जाता है।

  • पुलिंग- पुरुष जाति के लिये प्रयुक्त शब्द पुलिंग में कहे जाते हैं। जैसे - अजय, बैल, जाता है आदि
  • स्त्रीलिंग- स्त्री जाति के बोधक शब्द जैसे- निर्मला, चींटी, पहाड़ी, खेलती है, आदि


[संपादित करें] उपसर्ग और प्रत्यय

मुख्य लेख: उपसर्ग और प्रत्यय

वे शब्द जो किसी दुसरे शब्द के आरम्भ में लगाये जाते हैं। इनके लगाने से शब्दों के अर्थ परिवर्तन या विशिष्टता आ सकती है। उपसर्ग कोई बाइस (२२) हैं-
प्र प्रा अप सम् अनु अव निस् निर् दुस् दुर् वि आ नि सु अति अभि अधि अपि प्रति परि उप् उत्
प्र+मोद = प्रमोद, सु+शील = सुशील

वे शब्द जो किसी शब्द के अन्त में जोड़े जाते हैं। जैसे- गाड़ी+वान = गाड़ीवान, अपना+पन = अपनापन

[संपादित करें] संधि

मुख्य लेख: संधि (व्याकरण)

दो शब्दों के पास-पास होने पर उनको जोड़ देने को सन्धि कहते हैं। जैसे- सूर्य+उदय = सूर्योदय, अति+आवश्यक = अत्यावश्यक सन्यासी = सनय + आसी

[संपादित करें] समास

मुख्य लेख: समास

दो शब्द आपस में मिलकर एक सम्स्त पद की रचना करते हैं। जैसे-राज+पुत्र = राजपुत्र, छोटे+बड़े = छोटे-बड़े आदि
समास छ: होते हैं: द्वन्द्व, द्विगु, तत्पुरुष, कर्मधारय, अव्ययीभाव और बहुब्रिहि।

[संपादित करें] यह भी देखे

[संपादित करें] वाह्य सूत्र

अन्य भाषायें