काल और काल के भेद
क्रिया के जिस रूप से कार्य संपन्न होने का समय (काल) ज्ञात हो वह काल कहलाता है। काल के निम्नलिखित तीन भेद हैं -
- भूतकाल।
- वर्तमानकाल।
- भविष्यकाल।
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भूतकाल [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय (अतीत) में कार्य संपन्न होने का बोध हो वह भूतकाल कहलाता है। जैसे -
- बच्चा गया।
- बच्चा गया है।
- बच्चा जा चुका था।
ये सब भूतकाल की क्रियाएँ हैं, क्योंकि ‘गया’, ‘गया है’, ‘जा चुका था’, क्रियाएँ भूतकाल का बोध कराती है।
भूतकाल के निम्नलिखित छह भेद हैं -
- सामान्य भूत।
- आसन्न भूत।
- अपूर्ण भूत।
- पूर्ण भूत।
- संदिग्ध भूत।
- हेतुहेतुमद भूत।
सामान्य भूत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय में कार्य के होने का बोध हो किन्तु ठीक समय का ज्ञान न हो, वहाँ सामान्य भूत होता है। जैसे -
- बच्चा गया।
- श्याम ने पत्र लिखा।
- कमल आया।
आसन्न भूत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से अभी-अभी निकट भूतकाल में क्रिया का होना प्रकट हो, वहाँ आसन्न भूत होता है। जैसे-
- बच्चा आया है।
- श्यान ने पत्र लिखा है।
- कमल गया है।
अपूर्ण भूत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से कार्य का होना बीते समय में प्रकट हो, पर पूरा होना प्रकट न हो वहाँ अपूर्ण भूत होता है। जैसे-
- बच्चा आ रहा था।
- श्याम पत्र लिख रहा था।
- कमल जा रहा था।
पूर्ण भूत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कार्य समाप्त हुए बहुत समय बीत चुका है उसे पूर्ण भूत कहते हैं। जैसे-
- श्याम ने पत्र लिखा था।
- बच्चा आया था।
- कमल गया था।
संदिग्ध भूत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से भूतकाल का बोध तो हो किन्तु कार्य के होने में संदेह हो वहाँ संदिग्ध भूत होता है। जैसे-
- बच्चा आया होगा।
- श्याम ने पत्र लिखा होगा।
- कमल गया होगा।
हेतुहेतुमद भूत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से बीते समय में एक क्रिया के होने पर दूसरी क्रिया का होना आश्रित हो अथवा एक क्रिया के न होने पर दूसरी क्रिया का न होना आश्रित हो वहाँ हेतुहेतुमद भूत होता है। जैसे-
- यदि श्याम ने पत्र लिखा होता तो मैं अवश्य आता।
- यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।
वर्तमान काल [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से कार्य का वर्तमान काल में होना पाया जाए उसे वर्तमान काल कहते हैं। जैसे -
- मुनि माला फेरता है।
- श्याम पत्र लिखता होगा।
इन सब में वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं, क्योंकि ‘फेरता है’, ‘लिखता होगा’, क्रियाएँ वर्तमान काल का बोध कराती हैं।
इसके निम्नलिखित तीन भेद हैं -
- सामान्य वर्तमान।
- अपूर्ण वर्तमान।
- संदिग्ध वर्तमान।
सामान्य वर्तमान [संपादित करें]
- बच्चा रोता है।
- श्याम पत्र लिखता है।
- कमल आता है।
अपूर्ण वर्तमान [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से यह बोध हो कि कार्य अभी चल ही रहा है, समाप्त नहीं हुआ है वहाँ अपूर्ण वर्तमान होता है। जैसे -
- बच्चा रो रहा है।
- श्याम पत्र लिख रहा है।
- कमल आ रहा है।
संदिग्ध वर्तमान [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से वर्तमान में कार्य के होने में संदेह का बोध हो वहाँ संदिग्ध वर्तमान होता है। जैसे -
- अब बच्चा रोता होगा।
- श्याम इस समय पत्र लिखता होगा।
भविष्यत काल [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कार्य भविष्य में होगा वह भविष्यत काल कहलाता है। जैसे -
- श्याम पत्र लिखेगा।
- शायद आज संध्या को वह आए।
इन दोनों में भविष्यत काल की क्रियाएँ हैं, क्योंकि लिखेगा और आए क्रियाएँ भविष्यत काल का बोध कराती हैं।
इसके निम्नलिखित दो भेद हैं -
- सामान्य भविष्यत।
- संभाव्य भविष्यत।
सामान्य भविष्यत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से कार्य के भविष्य में होने का बोध हो उसे सामान्य भविष्यत कहते हैं। जैसे -
- श्याम पत्र लिखेगा।
- हम घूमने जाएँगे।
संभाव्य भविष्यत [संपादित करें]
क्रिया के जिस रूप से कार्य के भविष्य में होने की संभावना का बोध हो वहाँ संभाव्य भविष्यत होता है जैसे -
- शायद आज वह आए।
- संभव है श्याम पत्र लिखे।
- कदाचित संध्या तक पानी पड़े।