स्वप्न व्याख्या

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
टॉम पेन सोये हुए एक बुरा स्वप्न देख रहे हैं

स्वप्न व्याख्या सपनों को अर्थ देने की प्रक्रिया है। मिस्र और ग्रीस जैसे कई प्राचीन समाजों में, स्वप्न देखने को एक अलौकिक संचार या ईश्वरीय हस्तक्षेप माना जाता था जिसे वे ही सुलझा सकते थे जिनके पास निश्चित शक्तियां होती थीं। आधुनिक समय में, मनोविज्ञान की विभिन्न विचारधाराओं ने सपनों के अर्थ के बारे में सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं।

प्रारंभिक इतिहास[संपादित करें]

पूर्वी भूमध्यसागरीय[संपादित करें]

स्वप्न व्याख्या के सर्वाधिक पुराने लिखित उदाहरणों में से एक बेबीलोनिया के महाकाव्य एपिक ऑफ गिलगमेश से मिलता है।[1][2] गिलगमेश ने सपना देखा कि एक कुल्हाड़ा आसमान से गिरा था। लोग प्रशंसा और पूजा में उसके चारों ओर एकत्र हो गए थे। गिलगमेश ने अपनी मां के सामने कुल्हाड़ा फेंक दिया और फिर उसे पत्नी की तरह गले से लगा लिया। उसकी मां निनसुन ने सपने की व्याख्या की. उन्होंने कहा कि शीघ्र ही कोई शक्तिशाली प्रकट होगा. गिलगमेश उसके साथ संघर्ष करेगा और उसे पराजित करने की कोशिश करेगा, लेकिन वह सफल नहीं होगा. अंततः वे करीबी दोस्त बन जाएंगे और महान वस्तुएं हासिल करेंगे. उन्होंने जोड़ा, "तुमने उसे एक पत्नी की तरह गले लगाया था, इसका मतलब यह है कि वह तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगा. उस प्रकार तुम्हारा सपना हल हो गया है।"[3] हालांकि यह उदाहरण भी सपने को भविष्यसूचक के रूप में देखने की प्रवृत्ति प्रदर्शित करता है (भविष्य की भविष्यवाणी के रूप में), निनसुन की व्याख्या भी एक समकालीन दृष्टिकोण वाली सोच रखती है। लिंगीय और आक्रामक, कुल्हाड़ा, एक पुरुष का प्रतीक है आरंभ में आक्रामक होगा लेकिन बाद में मित्र के रूप में परिवर्तित हो जाएगा. एक कुल्हाड़े का आलिंगन करना, आक्रामकता को स्नेह और सौहार्द में परिवर्तित करना है।

प्राचीन मिस्र में पुजारी स्वप्न व्याख्याकार के रूप में भी काम करते थे। यूसुफ और डैनियल का परमेश्वर की ओर से भेजे गए सपनों की व्याख्या करने के लिए उल्लेख मिलता है और वास्तव में बाइबिल में सपनों की अनेक घटनाओं का अलौकिक रहस्योद्घाटन के रूप में वर्णन है। हीयेरोग्लिफ़िक्स द्वारा सपनों के चित्रण एवं उनकी व्याख्याएं स्पष्ट हैं। अधिकतर संस्कृतियों के इतिहास में सपनों का उल्लेखनीय महत्त्व रहा है।

प्राचीन यूनानी मंदिरों का निर्माण करते थे जिन्हें वे एस्क्लेपिओन्स कहते थे और जिनमें बीमार लोगों को उपचार हेतु भेजा जाता था। यह माना जाता था कि इलाज मंदिर की सीमाओं के अंदर सपने देखने से दैवी कृपा द्वारा प्रभावी होगा. सपनों को भविष्यसूचक या विशेष महत्त्व के शगुन भी माना जाता था। दूसरी शताब्दी ईस्वी में हुए डाल्डिस के आर्टेमिडोरस ने ओनिरोक्रिटिका (सपनों की व्याख्या) शीर्षक से एक विशद ग्रंथ लिखा था।[4] हालांकि आर्टेमिडोरस का मानना था कि सपने भविष्य की भविष्यवाणी कर सकते थे, उन्होंने सपनों के लिए अनेक समकालीन दृष्टिकोणों का पूर्वानुमान दिया था। उसने सोचा कि एक सपने की छवियों के अनेक अर्थ हो सकते थे तथा छवि का उसके घटक शब्दों में कूटानुवाद करके उसे समझा जा सकता था। टीरियनों के खिलाफ युद्ध करते समय सिकंदर ने सपना देखा कि एक ऐयाश (सैटर) उनकी ढाल पर नृत्य कर रहा था। आर्टेमिडोरस लिखते हैं कि इस सपने की इस प्रकार व्याख्या की गई थी: सैटर = सा टिरोस ("सूर तेरा हो जाएगा"), यह भविष्यवाणी करते हुए कि अलेक्जेंडर विजयी होगा. फ्रायड ने आर्टेमिडोरस के इस उदाहरण को स्वीकार किया था जब उन्होंने प्रस्ताव किया कि सपनों की व्याख्या एक चित्र पहेली की भांति करनी चाहिए.[5]

मध्ययुगीन इस्लामी मनोविज्ञान में कुछ हदीस से संकेत मिलते हैं कि सपनों के तीन भाग होते हैं, आरंभिक मुस्लिम विद्वानों ने भी अलग-अलग तीन प्रकार के सपनों: झूठे सपने, रोगकारक सपने और और सच्चे सपने.[6] इब्न सीरीं (654-728) सपनों पर लिखी अपनी पुस्तकों ता'बीर अल-रू'या तथा मुन्तखब अल-कलाम फी ताबीर अल-एहलाम के लिए प्रसिद्ध हुए थे। सपनों की व्याख्या की रीति से लेकर किसी के सपने में कुरान की खास सूरा पढ़ने की व्याख्या तक, स्वप्न व्याख्या पर यह कार्य 25 खंडों में विभाजित है, वे लिखते हैं कि आम आदमी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह एक आलिम (मुस्लिम विद्वान) की सहायता ले जो सांस्कृतिक संदर्भों तथा ऐसे कारणों और व्याख्याओं की सही समझ के साथ सपनों की व्याख्या करने में मार्गदर्शन कर सकते हैं।[7] अल-किंदी (अलकिंदस) (801-873) ने भी सपनों की व्याख्या पर ऑन स्लीप एंड ड्रीम्स नामक ग्रंथ लिखा था।[8] चेतना अध्ययन में अल-फराबी (872-951) ने सपनों पर एक ग्रंथ, ऑन द कॉज ऑफ ड्रीम्स लिखा था जो उऩकी पुस्तक बुक ऑफ ओपीनियन्स ऑफ द पीपल ऑफ द आइडियल सिटी के 24वें अध्याय के रूप में शामिल हुआ था। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने स्वप्न व्याख्या तथा सपनों की प्रकृति एवं कारणों में अंतर किया।[9][verification needed] द कैनन ऑफ मेडिसिन में अविसेना ने मनोदशा के सिद्धांत का विस्तार भावनात्मक पहलुओं, मानसिक क्षमता, नैतिक प्रवृत्तियों, आत्म-चेतना, गतिविधियों तथा सपनों को शामिल करने के लिए किया।[10] इब्न खलदून की मुकद्दीमाह (1377) कहती है कि "भ्रमित सपने" कल्पना के चित्र हैं जो ग्रहणबोध के द्वारा अंदर संग्रहित होते हैं तथा व्यक्ति के इंद्रिय ग्रहणबोध से निवृत्त हो जाने के बाद, विचार करने की क्षमता उन पर कार्य करती है।[11][verification needed]

चीन[संपादित करें]

मानक स्वप्न-व्याख्या पर 16वीं शताब्दी में चेन शियुआन द्वारा संकलित एक परंपरागत चीनी पुस्तक लॉफ्टी प्रिंसिपल्स ऑफ ड्रीम इंटरप्रिटेशन है।[12][13][14][15] चीनी विचारकों ने भी स्वप्न व्याख्या के बारे में, यह प्रश्न कि हम कैसे जानते हैं कि हम सपना देख रहे हैं और कैसे जानते हैं कि हम जाग रहे हैं, जैसे गहन विचारों उठाया था। यह चुआंग-त्जू में लिखा है: "एक बार चुआंग चाउ ने सपना देखा कि वह एक तितली था। वह खुशी से इधर-उधर उड़ता रहा, जिस स्थिति में वह था उससे काफी प्रसन्न और वह चुआंग चाउ के बारे में कुछ भी नहीं जानता था। अब वह जागा और पाया कि वह तो फिर से बिलकुल चुआंग चाउ ही है। अब चाउ सपना देखता है कि वह तितली था या क्या अब तितली सपना देखती है कि वह चाउ थी? यह आधुनिक संज्ञानात्मक तंत्रिका विज्ञान में एक अत्यंत रोचक विषय, वास्तविकता निगरानी का प्रश्न उठाता है।[16][17]

यूरोप[संपादित करें]

19वीं शताब्दी के अंत में स्वप्न व्याख्या को मनोविश्लेषण के एक भाग के रूप में लिया गया था; सपने की विदित, प्रकट विषयवस्तु का विश्लेषण किया जात है तो स्वप्नदृष्टा के मानस के लिए उसका अदृश्य अर्थ सामने आता है। इस विषय पर हुए मौलिक कार्यों में से एक सिगमंड फ्रायड की द इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स है।

मनोविज्ञान[संपादित करें]

फ्रायड[संपादित करें]

साँचा:Psychoanalysis

यह उनकी पुस्तक द इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स[5] (दिए ट्रॉमडेउटुंग ; शाब्दिक अर्थ "स्वप्न-व्याख्या") जो पहली बार 1899 में प्रकाशित हुई थी (लेकिन दिनांकित 1900) में था, कि सिगमंड फ्रायड ने पहली बार यह तर्क दिया था कि सभी सपनों की विषय-वस्तु की प्रेरणा कामनापूर्ति है और स्वप्न देखे जाने का उत्प्रेरक प्रायः स्वप्न से पिछले दिन की घटनाओं में पाया जा सकता है, जिसे उन्होंने "दिवस अवशेष" कहा. बहुत छोटे बच्चों के मामले में फ्रायड ने दावा किया, यह आसानी से देखा जा सकता था कि छोटे बच्चे सीधी तरह से पिछले दिन ("स्वप्न दिन") उनमें उठी इच्छाओं की पूर्ति को सपने में देखते हैं। लेकिन, वयस्कों में स्थिति और अधिक जटिल है, है फ्रायड के सिद्धांत में, सपनों की तथाकथित "प्रकट विष्यवस्तु" अवचेतन में उपस्थित अव्यक्त स्वप्न-विचारों का अत्यधिक प्रच्छन्न व्युत्पाद होने के साथ, वयस्कों के सपने विरूपित होते हैं। इस विरूपण और प्रच्छन्नता के परिणामस्वरूप स्वप्न का वास्तविक महत्त्व छुपा रहता हैः एक वातोन्माद का रोगी अपने वातोन्माद के लक्षणों से संबंध और उनके महत्त्व को जितना समझता है, स्प्नदृष्टा उससे अधिक अपने सपने के वास्तविक अर्थ को पहचानने में सक्षम नहीं होता.

फ्रायड के मूल निरूपण में अव्यक्त स्वप्न-विचार का "सेंसर" नामक एक अंतरात्मिक बल के अधीन होना वर्णित किया गया था; तथापि बाद के वर्षों में उनकी अधिक परिष्कृत शब्दावली में, चर्चा पराहम् तथा "अहं के रक्षा बलों के कार्य" के रूप में होती थी। उन्होंने माना कि जाग्रत जीवन में ये तथाकथित "अवरोध" अवचेतन की दमित इच्छाओं को चेतना में प्रवेश करने से पूर्णतः रोक देते हैं; यद्यपि नींद की निम्नतर अवस्था में ये इच्छाएं कुछ सीमा तक उभर आने में सफल हो जाती थी, अवरोध अभी भी इतने सशक्त होते थे कि उनकी वास्तविक प्रकृति को छुपाने के लिए "प्रच्छन्नता का एक आवरण" उत्पन्न कर सकें. फ्रायड का दृष्टिकोण यह थी कि सपने तो समझौते हैं जो यह सुनुश्चित करते हैं कि "दमित इच्छाओं की प्रच्छन्न पूर्ति" से नींद में व्यवधान न आए, वे इच्छाओं की पूर्ति का प्रतिनिधित्व करने में सफल होते हैं जो अन्यथा नींद में व्यवधान उत्पन्न कर के स्वप्नदृष्टा को जगा सकते हैं।

फ्रायड का उत्कृष्ट आरंभिक स्वप्न विश्लेषण "इरमा का इंजेक्शन" हैः इस स्वप्न में फ्रायड की एक पुरानी मरीज दर्द की शिकायत करती है। इस सपना, फ्रायड के सहयोगी द्वारा इरमा को जीवाणुमुक्त किए बिना इंजेक्शन देते हुए चित्रित करता है। सपनों की प्रकट विषयवस्तु से अव्यक्त स्वप्न विचार का कूटानुवाद करने की तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए इसका उपयोग करते हुए फ्रायड हमें सपनों के तत्वों के साथ साहचर्य के पन्ने प्रदान करते हैं।

फ्रायड ने निम्नलिखित शब्दों में मनोवैश्लेषिक स्वप्न-विश्लेषण की वास्तविक तकनीक का वर्णन किया है:

You entirely disregard the apparent connections between the elements in the manifest dream and collect the ideas that occur to you in connection with each separate element of the dream by free association according to the psychoanalytic rule of procedure. From this material you arrive at the latent dream-thoughts, just as you arrived at the patient's hidden complexes from his associations to his symptoms and memories... The true meaning of the dream, which has now replaced the manifest content, is always clearly intelligible. [Freud, Five Lectures on Psycho-Analysis (1909); Lecture Three]


फ्रायड ने उन विरूपण प्रक्रियाओं को सूचीबद्ध किया जो, उन्होंने दावा किया कि दमित इच्छाओं पर कार्य करके उन्हें स्मरित सपनों में परिवर्तित करती हैं: इन विरूपणों (तथाकथित "स्वप्न-कार्य") के कारण सपनों की प्रकट विषयवस्तु विश्लेषण के द्वारा जाने गए अव्यक्त स्वप्न विचार से अत्यंत भिन्न होती है- इन विरूपणों को उलट कर अव्यक्त विषटवस्तु को जाना जा सकता है।

प्रक्रियाओं में शामिल हैं:

  • संक्षेपण - एक स्वप्न पात्र अनेक साहचर्यो और विचारों का प्रतिनिधित्व करता है; अत: "स्वप्न विचारों के विस्तार और समृद्धता की तुलना में सपने संक्षिप्त, अत्यल्प और अल्पशाब्दिक होते हैं।
  • विस्थापन - एक स्वप्न विषय का भावनात्मक महत्व उसके वास्तविक विषय या विषयवस्तु से अलग हो जाता है और एक बिलकुल भिन्न विषय से जुड़ जाता है जो नियंत्रक का संदेह जाग्रत नहीं करता.
  • प्रतिनिधित्व - एक विचार दृश्य छवियों में अनूदित होता है।
  • प्रतीकवाद -एक प्रतीक एक कार्य, व्यक्ति या विचार को प्रतिस्थापित करता है।

स्मरण रही प्रकट विषयवस्तु के विभिन्न तत्वों से किसी प्रकार का अर्थ या कहानी बनाने की स्वप्नदृष्टा की स्वाभाविक प्रवृत्ति के परिणाम, “माध्यमिक विस्तार” को भी इसमें जोड़ा जा सकता है। (फ्रायड, वास्तव में इस बात पर जोर देने के अभ्यस्त थे कि सपने की प्रकट विषयवस्तु के एक भाग के संदर्भ में दूसरे भाग की व्याख्या करने का प्रयास करना, जैसे प्रकट स्वप्न ने किसी प्रकार एक एकीकृत या सुसंगत अवधारणा की रचना की हो, सिर्फ व्यर्थ ही नहीं भ्रामक भी है।

फ्रायड ने माना कि व्यग्रता सपनों और डरावने सपनों का अनुभव स्वप्न-कार्य में असफलता का परिणाम है: अपनी इच्छा-पूर्ति के सिद्धांत का खंडन करने की बजाय, इस प्रकार की अद्भुत घटना ने प्रदर्शित किया कि अति शक्तिशाली एवं अपर्याप्त रूप से प्रच्छन्न दमित इच्छाओं की जानकारी के प्रति अहं के द्वारा किस प्रकार प्रतिक्रिया की गई। अभिघातज सपनों (जहां स्वप्न केवल अभिघातज अनुभव को दोहराता है) को अंततः इस सिद्धांत के अपवाद के रूप में स्वीकार कर लिया गया.

फ्रायड ने सुविदित रूप से मनोवैश्लेषिक स्वप्न-व्याख्या को "मस्तिष्क की अचेतन गतिविधियों के ज्ञान की ओर शाही सड़क" के रूप में वर्णित किया था; हालांकि वे जिस प्रकार इस विषय पर उनके विचारों को अनुचित ढंग से प्रस्तुत किया गया या समझा नहीं गया, उस पर अफसोस और असंतोष प्रकट करने में सक्षम थे।

The assertion that all dreams require a sexual interpretation, against which critics rage so incessantly, occurs nowhere in my Interpretation of Dreams ... and is in obvious contradiction to other views expressed in it.[18]


एक अन्य अवसर पर उन्होंने कहा कि अव्यक्त एवं प्रकट विषयवस्तु के भेद की पहचान करने में सफल होने वाला व्यक्ति ”संभवतः उनकी पुस्तक इंटरप्रिटेशन ऑफ ड्रीम्स के अधिकाश पाठकों से आगे तक चला गया था".

युंग[संपादित करें]

यद्यपि फ्रायड के सिद्धांत को सिरे से ही खारिज न करते हुए, कार्ल युंग ने सपनों को अतृप्त इच्छाओं का निरूपण मानने वाले फ्रायड के सिद्धांत को एकतरफा और सरल माना (फ्रायड ने इसका जवाब खुले आम यह कह कर दिया कि युंग उन लोगों के लिए अच्छे थे जिन्हें एक पैगंबर की तलाश थी [फ्रायड, "प्रारंभिक व्याख्यान"]). युंग का तर्क था कि सपने के साथ साहचर्य एकत्र करने की फ्रायड की प्रक्रिया से स्वप्नदृष्टा की मानसिक अवस्था में प्रवेश होगा- एक व्यक्ति का किसी वस्तु के साथ साहचर्य मानसिक अवस्था को उजागर करेगा, जैसा युंग ने प्रयोग द्वारा दिखाया[19] - लोकिन आवश्यक नहीं कि स्वप्न के अर्थ के पास भी पहुंच पाएं.[20] युंग आश्वस्त थे कि सपनों की व्याख्या का दायरा अधिक बड़ा था जो व्यक्तिगत एवं सामूहिक दोनों सहित सम्पूर्ण अवचेतन की समृद्धि और जटिलताओं को प्रतिबिंबित करता था। युंग मानस को एक आत्म-विनियमित जीव मानते थे जिसमें सचेतन प्रवृत्तियों की कमी की अचेतन में (स्वप्न में) विपरीत प्रवृत्तियों द्वारा पूर्ति किये जाने की संभावना होती है।[21]

युंग ने स्वप्न सामग्री के विश्लेषण हेतु दो बुनियादी दृष्टिकोण प्रस्तावित किये: उद्देश्यपरक और व्यक्तिपरक.[22] उद्देश्यपरक दृष्टिकोण में, सपने में प्रत्येक व्यक्ति, जो वह है उसी को संदर्भित करता है: मां मां है, प्रेमिका प्रेमिका है, आदि. व्यक्तिपरक दृष्टिकोण में, सपने में प्रत्येक व्यक्ति स्वप्नदृषटा के एक पहलू का प्रतिनिधित्व करता है। युंग ने तर्क दिया कि स्वप्नदृष्टा के लिए व्यक्तिपरक दृष्टिकोण को स्वीकार करना और अधिक कठिन है, लेकिन सर्वाधिक अच्छे स्वप्न-कार्य में स्वप्नदृष्टा यह पहचान जाएगा कि स्वप्न के पात्र स्वप्नदृष्टा के अनभिज्ञात पहलू का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इस प्रकार, यदि स्वप्नदृष्टा का एक पागल हत्यारे द्वारा पीछा किया जा रहा है, तो अंततः स्वप्नदृष्टा पहचान जाएगा कि यह उस का स्वयं का हिंसक आवेग था। समष्टि मनोचिकित्सकों ने यह दावा करते हुए कि स्वप्न में निर्जीव वस्तुएं भी स्वप्नदृष्टा के पहलुओं का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं, व्यक्तिपरक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया है।

युंग का मानना था कि आद्यरूप जैसे वैर-भाव, एनिमा, छाया तथा अन्य सपनों में स्वयं को स्वप्न प्रतीकों या आकृतियों के रूप में प्रकट करते हैं। ऐसी आकृतियां एक बूढ़े आदमी, एक युवा नौकरानी या एक विशालकाय मकड़ी का रूप ले सकती हैं, जैसा मामला हो. प्रत्येक एक अचेतन प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करती है जो मुख्य रूप से चेतन मस्तिष्क से छुपी रहती है। यद्यपि ये स्वप्नदृष्टा के मानस के अभिन्न भाग हैं, ये प्रकटीकरण मुख्यतः स्वायत थे और स्वप्नदृष्टा द्वारा इन्हें बाह्य व्यक्ति के रूप में समझा गया था। इन प्रतीकों के रूप में प्रकट हुए आद्यरूपों के साथ परिचय, प्रत्यक्ष रूप में मानस के पृथक भागों का एकीकरण करते हुए तथा समग्र रूप से खुद को समझने की प्रक्रिया में योगदान देते हुए, व्यक्ति की अचेतन प्रवृत्तियों के लिए जागरुकता बढ़ाता है, जिसे वे सर्वोपरि मानते हैं।[21]

युंग ने माना कि चेतन मस्तिष्क द्वारा दमित सामग्री, फ्रायड की अभिधारणा के अनुसार जो अचेतन बनाती हैं, वे उनकी स्वयं की छाया की धारणा के सदृश ही है, जो कि अपने आप में अचेतन का एक छोटा सा भाग है।

युंग ने आँख बंद करके ग्राहक की व्यक्तिगत स्थिति की एक स्पष्ट समझ के बिना स्वप्न प्रतीकों के अर्थ बताने के खिलाफ चेतावनी दी. उन्हों स्वप्न प्रतीकों के लिए दो दृष्टिकोण वर्णित किए: कारणात्मक दृष्टिकोण तथा अंतिम दृष्टिकोण.[23] कारणात्मक दृष्टिकोण में, प्रतीक कुछ मौलिक प्रवृत्तियों तक कम हो जाते हैं। इस प्रकार, एक तलवार एक लिंग का प्रतीक है, तो एक साँप का प्रतीक भी हो सकती है। अंतिम दृष्टिकोण में स्वप्न व्याख्याकार पूछता है, "यही प्रतीक क्यों और दूसरा क्यों नहीं?" इस प्रकार, एक एक लिंग का प्रतिनिधित्व करने वाली तलवार कठोर, पैनी, निर्जीव और विनाशकारी है। एक लिंग का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सांप सजीव है, खतरनाक है, शायद जहरीला और घिनौना है। अंतिम दृष्टिकोण आप को स्वप्नदृष्टा की प्रवृत्तियों के बारे में अतिरिक्त बातें भी बता देता है।

तकनीकी तौर पर, युंग ने स्वप्न को अनावृत कर समस्त जानकारी का सार स्वप्नदृष्टा को प्रस्तुत करने की सिफारिश की. यह विलहेम स्टेकल द्वारा वर्णित प्रक्रिया का एक रूपांतरण था, जिन्होंने स्वप्न को एक समाचारपत्र का एक लेख समझने और उस पर एक शीर्षक लिखने के रूप में समझने की सिफारिश की थी।[24] हैरी स्टैक सुलिवान ने भी इसी तरह की प्रक्रिया "स्वप्न आसवन" का वर्णन किया था।[25]

हालांकि युंग ने आद्यरूप प्रतीकों की सार्वभौमिकता को स्वीकार किया, उन्होंने संकेत-छवियों का एक के साथ एक संकेतार्थ का अपने अर्थ के साथ संबंध होने के कारण इस धारणा का विरोध किया। उनका दृष्टिकोण प्रतीकों और उनके उत्तरदायी अथों के बीच मौजूद गतिशालता और तरलता को पहचानना था। स्वप्न को किन्हीं पूर्व निर्धारित विचारों के अनुरूप ढालने की बजाय प्रतीकों की उनके मरीज के प्रति अपने महत्त्व के लिए खोज की जानी चाहिए. यह स्वप्न विशलेषण को एक सैद्धांतिक और हठधर्मी कसरत बनने अर्थात मरीज की स्वयं की मनोवैज्ञानिक अवस्था से दूर हटा कर, रोकता है। इस विचार की सेवा में उन्होंने 'छवि से चिपकने'- मरीज के किसी विशेष छवि के साथ साहचर्य की गहराई से खोज करने के महत्त्व पर बल दिया. फ्रायड के मुक्त साहचर्य के विपरीत उन्होंने माना कि यह छवियों की प्रमुखता से विचलन था। उदाहरण के लिए वे इसे ”सौदा टेबल" के रूप में वर्णित किया। एक स्वप्नदृष्टा से यह अपेक्षा की जा सकती है कि उसका इस छवि के साथ कुछ संबंध होगा, उसका किसी प्रकार के महत्त्व से अनभिज्ञ होना या परिचय का अभाव होना किसी के भी मन में संदेह उत्पन्न कर सकता है। युंग एक मरीज से छवि की जितना हो सके स्पष्ट कल्पना करने को कहते थे और फिर उसे उस छवि का वर्णन करने को कहते, मानो वह जानते ही न हों कि "सौदा मेज" क्या होती थी। युंग ने स्वप्न विश्लेषण में संदर्भ के महत्व पर बल दिया.

युंग ने जोर देकर कहा कि स्वप्न कोई घुमावदार पेली नहीं थी जिसके गूढ़ अर्थ को समझा जाना था, इसलिए उसके पीछे के सच्चे कारणात्मक कारकों को ज्ञात करना चाहिए. सपने झूठ पकड़ने की मशीन नहीं थे, जिससे चेतन विचार प्रक्रिया के पीछे साथ होश में सोचा प्रक्रियाओं के पीछे की धोखेबाजी का खुलासा किया जा सके. अचेतन की तरह सपनों की अपनी ही भाषा थी। अचेतन के प्रतिनिधित्व के रूप में, स्वप्न छवियों की उनकी खुद की प्रधानता और तर्क हैं।

युंग का मानना था कि सपनों में अपरिहार्य सत्य, दार्शनिक घोषणाएं, भ्रम, अनियंत्रित कल्पनाएं, यादें, योजनाएं, तर्कहीन अनुभव, यहां तक कि दूरसंवेदनीय दृश्य हो सकते थे।[26] जैसे मानस में एक प्रकाशित पक्ष होता है जिसे हम चेतन अवस्था में अनुभव करते हैं, इसका एक अंधेरा पक्ष भी होता है जिसकी हम स्वप्न जैसी कल्पनाएं करते हैं। युंग ने तर्क दिया कि हम अपने चेतन अनुभव के महत्व पर शक नहीं है करते, तब हमें हमारे अचेतन जीवन के मूल्य के संबंध में पूर्वानुमान नहीं लगाने चाहिए.

हॉल[संपादित करें]

1953 में, केल्विन एस हॉल ने सपनों का एक सिद्धांत विकसित किया जिसमें स्वप्न देखने को भी एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया माना गया.[27] हॉल का तर्क था कि एक स्वप्न केवल एक विचार या विचार श्रृंखला थी जो सोने के दौरान हुई, स्वप्न छवियां व्यक्तिग जब बस एक या विचार है कि नींद के दौरान हुई के बारे में सोचा अनुक्रम था और सपना छवियों व्यक्तिगत धारणाएं का दृश्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं कि. उदाहरण के लिए, यदि कोई सपना देखता है कि उस पर मित्रों ने हमला किया है, यह नित्रता के डर का प्रत्यक्षीकरण हो सकता है; एक और अधिक जटिल उदाहरण है, जिसमें एक सांस्कृतिक रूपक की आवश्यकता है, कि सपने में एक बिल्ली इस बात का प्रतीक है कि उसे अपने अंतर्ज्ञान के प्रयोग की आवश्यकता है। अंग्रेजी वक्ताओं के लिए यह सुझाव दिया गया है कि एक स्वप्नदृष्टा को पहचानना चाहिये कि देअर इज "मोर दैन वन वे टु स्किन ए कैट" या अन्य शब्दों में, किसी कार्य को करने के एक से अधिक तरीके होते हैं।

फैराडे, क्लिफ्ट, एट अल.[संपादित करें]

1970 के दशक में, एन फैराडे तथा अन्य ने आप-स्वयं-करें स्वप्न व्याख्या पर एक पुस्तक प्रकाशित कर के तथा सपनों को साझा करने और विश्लेषण करने के लिए समूह बना कर स्वप्न व्याख्या को मुख्य धारा में लाने में सहायता की थी। फैराडे ने सपनों के किसी के जीवन में होने वाली स्थितियों पर संप्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया। उदाहरण के लिए, कुछ सपने आगे घटने वाली किसी घटना की चेतावनी हो सकते हैं, जैसे परीक्षा में असफल होने का सपना, तैयारी न होने की ठीक-ठीक चेतावनी हो सकती है। इस तरह के संदर्भ के बाहर, इसका संबंध किसी अन्य परीक्षा में असफल होने से हो सकता है। या इसकी श्लेशात्मक प्रकृति हो सकती है, जैसे कोई अपने जीवन के किसी पहलू की जांच करने में असफल रहा हो सकता है।

फैराडे ने लिखा कि "आधुनिक शोध से एक बात दृढ़ता से उभरी है कि बहुसंख्या ऐसे सपनों की है जो उन बातों को प्रतिबिंबित करते हुए लगते हैं जो किसी तरह से पिछले एक या दो दिन पहले हमारे दिमाग में पहले से रही थी।[28]

1980 और 1990 के दशकों में वालेस क्लिफ्ट और जीन डेल्बी क्लिफ्ट ने सपनों में उत्पन्न छवियों और स्वप्नदृष्टा के जाग्रत जीवन के बीच संबंध पर आगे खोज की. उनकी पुस्तकों ने उपचारात्मकता एवं स्वास्थ्य की ओर जाने पर विशेष जोर देते हुए सपनों में पैटर्न की पहचान की तथा जीवन के परिवर्तनों की खोज हेतु सपनों के विश्लेष्ण के तरीकों की पहचान की.[29]

सपने देखने का आदिम प्रवृत्ति पूर्वाभ्यास सिद्धांत[संपादित करें]

दो शोधकर्ताओं ने माना है कि सपने एक जैविक क्रिया है, जहां सामग्री को किसी विश्लेषण या व्याख्या की आवश्यकता नहीं है, वह सामग्री शरीर के शारीरिक कार्यों के एक स्वचालित उत्तेजना तथा सहज मानवीय व्यवहार को मजबूती प्रदान करती है। इसलिए सपने मानव, पशु, अस्तित्व और विकास की रणनीति के हिस्से हैं।

प्रोफेसर अंटी रिनोन्सुओ (टूर्कू विश्वविद्यालय, फिनलैंड) ने अपने विचारों को भय पूर्वाभ्यास तक सीमित कर लिया था, जहां सपने हमारी प्राथमिक आत्मरक्षा की सहज प्रवृत्तियों का प्रयोग करते हैं तथा उन्होंने इस तर्क को दृढ़ता से कई प्रकाशनों में कहा है।[30]

कीथ स्टीवंस[31][32][33] ने इस सिद्धांत का सभी मानवीय प्रवृत्तियों के लिए विस्तार किया है, जिसमें शामिल हैं खुद को खतरा, परिवार के सदस्यों को खतरा, जोड़ों का बंधन और प्रजनन, जिज्ञासा और चुनौतियों तथा व्यक्तिगत श्रेष्ठता और आदिवासी स्थिति के लिए अभियान. उन्होंने 22000 इंटरनेट प्रस्तुतियां में से एक नमूने का नौ श्रेणियों में वर्गीकरण किया है और सपना सामग्री तथा प्रवृत्ति पूर्वाभ्यास की सार्वभौमिक समानता का प्रदर्शन किया है। यह माना गया है कि सपने की क्रिया स्वचालित है, सामग्री के जवाब में, कार्य करते हुए और शरीर रसायन को उत्तेजित करते हुए और तंत्रिका संबंधी गतिविधियां भी शामिल होंगी यदि परिदृश्य वास्तविक जीवन में घटित होता है, ताकि उद्देशेय का प्राप्ति के लिए सपने को याद रखने की जरूरत न रहे.

यह तर्क दिया गया है कि, एक बार एक स्वप्नदृष्टा ने सपने में एक खतरे का अनुभव किया (स्वयं या परिवार के किसी सदस्य के लिए), इससे उसकी वास्तविक जीवन में खतरे का सामना करने की क्षमता बढ़ गई, अतः ऐसे सपने, मनुष्यों और जानवरों दोनों में अस्तित्व के लिए सहायक होते हैं। खतरे का पूर्वाभास विशिष्ट हो सकता है, उदाहरण के लिए, एक जंगली कुत्ते द्वारा हमला, लेकिन यह सामान्य भी हो सकता है, उस स्थिति में सपना देखते समय खतरे के प्रति शारीरिक प्रतिक्रिया सक्रिय और प्रबलित हो जाती है।

मानव प्रजनन के संबंध में यह सिद्धांत कहता है कि जोड़े बनाना, संबंध और सहवास प्रजाति की पुनरुत्पत्ति के प्रति उत्प्रेरित करते हैं, सर्वश्रेष्ठ साथी ढूंढने और इष्टतम आनुवंशिक मिश्रण प्राप्त करने की प्रत्येक व्यक्ति महत्वाकांक्षा की पूर्ति हेतु उन सपनों पर जोर देते हैं जो चयन के सिद्धांत को प्रोत्साहित करते हैं। इस संदर्भ में, स्वप्न कार्य निष्ठा और जीवन के लिए सहवास के मानवीय नैतिक मूल्यों के विपरीत हैं। विशेष रूप से, युवा महिलाएं अक्सर गर्भवती होने और बच्चे को जन्म देने के सपने देखती हैं, अत्यंत सकारात्मक सपने जो सीधे प्रजनन हेतु प्रोत्साहित करते हैं।

प्रस्थिति के बारे में, ऐसा माना जाता है कि श्रेष्ठता या हीनता से संबंधित सपने, या तो सफलता की सकारात्मक जीवन पद्धति द्वारा या विफलता की नकारात्मक जीवन विधा द्वारा स्वप्नदृष्टा के तात्कालिक मानवीय अनुक्रम में अपनी प्रस्थिति सुधारने के निश्चय को उत्प्रेरित करते हैं। इसलिए, ऐसा विश्वास किया जाता है कि सपने प्रतिस्पर्द्धा तथा वातावरण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त लोगों की प्रजनन सफलता को प्रोत्साहन देते हैं।

अंत में, अन्य सपने आनंददायक स्वप्न उपलब्धियों या निराशापूर्ण बाधाओं और अवरोधों की चरम सीमाओं के माध्यम से खोज करने तथा पूछताछ करने के निश्चय को उत्प्रेरित करते हैं। बाद वाले सपने इस संकल्प को बढ़ावा देते हैं कि अपनी इच्छाओं के परिप्रेक्ष्य में हमें हार नहीं माननी है, ताकि व्यक्ति और प्रजातियां जीवन में आगे बढ़ सकें. सपना देखने वाले अफ्रीकी बारहसिंघे के लिए पहाड़ी के ऊपर एक हरा-भरा चरागाह हो सकता है, किसी मानवीय स्वप्नदृष्टा के लिए एक परमाणु को विभाजित करना हो सकता है।

स्वप्न व्याख्याकारों के लक्षण[संपादित करें]

जो लोग सपनों की व्याख्या के कार्य में "अब और तब या अक्सर" लगे रहते हैं तथा वे जो "यदा-कदा अथवा कभी भी नहीं" लगते, के लक्षणों की तुलना का बहुत कम कार्य हुआ है। माइकल थैलबोर्न के प्रारंभिक अप्रकाशित अनुसंधान से पता चलता है कि जादुई विचारों, काल्पनिक रुझान तथा अपसामान्य विश्वास पर "स्वप्न व्याख्याकारों" को अधिक अंक मिले हैं। यह अज्ञात बना हुआ है कि क्या यह मापदंड अब और तब या अक्सर स्वप्न व्याख्या करने वाले स्वप्न व्यख्याकारों के लिए ही तय किये गए हैं या इनमें मनोविश्लेषक चिकित्सक भी शामिल हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

आधुनिक कला हेनरी रॉशे का संग्रहालय.द ड्रीम, 1910
  • समकालीन स्वप्न की व्याख्या
  • स्वप्न शब्दकोश
  • स्वप्न साझा
  • ड्रीमलॉग
  • स्वप्नों की व्याख्या

संदर्भ[संपादित करें]

  1. थॉम्पसन, आर. (1930) द एपिक ऑफ़ गिलगमेश . ऑक्सफोर्ड: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस.
  2. जॉर्ज, ए. ट्रांस. (2003) बेबीलोन गिलगमेश महाकाव्य: गंभीर संस्करण और स्फानाकार ग्रंथ. ऑक्सफोर्ड, ब्रिटेन: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस.
  3. ओपेंहीम, ए. (1956) प्राचीन नियर ईस्ट में ऐसिरियन ड्रीम बुक के व्याख्या के साथ द इंटरप्रिटेशन ऑफ़ ड्रीम्स. ट्रैन्ज़ैक्शन ऑफ़ द अमेरिकन फिलासॉफिकल सोसाइटी, 46(3): 179-373. पृष्ठ 247.
  4. आर्टेमिडोरस (1990) द इंटरप्रिटेशन ऑफ़ ड्रीम्स: ओनिरोक्रितिका. व्हाइट, आर., ट्रांस., टॉरेंस, सीए (CA): ऑरिजनल बुक्स, 2 संस्करण.
  5. फ्रिउड, एस. (1900) द इंटरप्रिटेशन ऑफ़ ड्रीम्स . न्यू यॉर्क: एवोन, 1980.
  6. (Haque 2004, p. 376)
  7. (Haque 2004, p. 375)
  8. (Haque 2004, p. 361)
  9. (Haque 2004, p. 363)
  10. Lutz, Peter L. (2002), The Rise of Experimental Biology: An Illustrated History, Humana Press, प॰ 60, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0896038351 
  11. इब्न खल्डून, फ्रांज रोसेन्थल, एनजे दाऊद (1967), द मुक़द्दीमः: एन इंट्रोडक्शन टू हिस्ट्री, पृष्ठ 338, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, ISBN 0-691-01754-9
  12. लॉफ्टी प्रिंसिपल्स ऑफ़ ड्रीम इंटरप्रिटेशन, "आंतरिक अध्याय 1-4"
  13. लॉफ्टी प्रिंसिपल्स ऑफ़ ड्रीम इंटरप्रिटेशन, "आंतरिक अध्याय 5"
  14. लॉफ्टी प्रिंसिपल्स ऑफ़ ड्रीम इंटरप्रिटेशन, "आंतरिक अध्याय 6-9"
  15. लॉफ्टी प्रिंसिपल्स ऑफ़ ड्रीम इंटरप्रिटेशन, "आंतरिक अध्याय 10"
  16. जॉनसन, एम., कहां, टी. और राय, सी. (1984) सपने और हकीकत की निगरानी. मनोविज्ञान प्रायोगिक जर्नल: जनरल, 113:329-344.
  17. ब्लेच्नर, एम. (2005) मायावी भ्रम: सपनों और जाग्रत जीवन में वास्तविक न्याय और वास्तविक कार्य. न्यूरो मनोविश्लेषण, 7: 95-101.
  18. Freud, S. (1900) op.cit., (1919 edition), p. 397
  19. जंग, सी. जी. (1902) सामान्य विषयों की संघ. इन: सी.जी. जंग के कलेक्टेड वर्क्स, खंड. 2. प्रिंसटन, एनजे: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, पीपी 3-99.
  20. जैकोबी, जे. (द साइकोलॉजी सी. जी. जंग. न्यू हेवन, सीटी: येल यूनिवर्सिटी प्रेस.
  21. Storr, Anthony (1983). The Essential Jung. New York. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0691024553. 
  22. जंग, सी. जी. (1948) स्वप्न मनोविज्ञान के सामान्य पहलू. इन: ड्रीम्स . ट्रांस., आर. हल. प्रिंसटन, एनजे: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 1974, पीपी 23-66.
  23. जंग, सी.जी. (1948) ओप.सीट.
  24. स्टेकेल, डब्ल्यू. (1911) Die Sprache des Traumes (स्वप्न की भाषा). विसबैडेन: जे.एफ. बर्मन
  25. सलीवन, एच. एस. (1953) द इंटरपर्सनल थ्योरी ऑफ़ साइकाइअट्री . न्यूयॉर्क: नॉर्टन.
  26. Jung, Carl (1934). The Practice of Psychotherapy. "The Practical Use of Dream-analysis". प॰ 147. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 071001645X. 
  27. Calvin S. Hall. "A Cognitive Theory of Dreams". dreamresearch.net accessdate=7 अक्टूबर 2010. http://psych.ucsc.edu/dreams/Library/hall_1953b.html. 
  28. Faraday, Ann. The Dream Game. प॰ 3. 
  29. Clift, Jean Dalby; Clift, Wallace (1984). Symbols of Transformation in Dreams. The Crossroad Publishing Company. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8245-0653-7. Clift, Jean Dalby; Clift, Wallace (1988). The Hero Journey in Dreams. The Crossroad Publishing Company. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8245-0889-0. Clift, Jean Dalby (1992). Core Images of the Self: A Symbolic Approach to Healing and Wholeness. The Crossroad Publishing Company. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8245-1218-9. 
  30. [1] (बेहतर प्रशस्ति पत्र की जरूरत)
  31. [2]
  32. [3]
  33. [4]

ग्रंथ सूची[संपादित करें]

बाहरी लिंक्स[संपादित करें]