सोरेन किर्केगार्द

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 अस्तित्ववाद दर्शन के पहले समर्थक हलाकि उन्होने अस्तित्ववाद शब्द का प्रयोग नहीं किया  गणित और विज्ञान का वस्तुनिष्ठ सत्य के बजाय व्यक्तिपरक मानव अनुभव को महत्व दिया  मौलिक मान्यताओं और विश्वासों को स्वतंत्र रूप से चुनने के अधिकारों को दिये जाने का समर्थन किया  स्वतंत्र रूप से विकल्पों के चुनने पर चुनने वाले की प्रकृति और पहचान के बदलने की प्रक्रिया का अध्ययन किया ।  एक व्यक्ति अपने या अपने सोच के अनुसार जीना चाहिए – इस बात के समर्थक थे