सौन्दर्यशास्त्र
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सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics) संवेदनात्म-भावनात्मक गुण-धर्म और मूल्यों का अध्ययन है। कला, संस्कृति और प्रकृति का प्रतिअंकन ही सौंदर्यशास्त्र है। सौंदर्यशास्त्र, दर्शनशास्त्र का एक अंग है।
सौन्दर्यशास्त्र वह शास्त्र है जिसमें कलात्मक कृतियों, रचनाओं आदि से अभिव्यक्त होने वाला अथवा उनमें निहित रहने वाले सौंदर्य का तात्विक, दार्शनिक और मार्मिक विवेचन होता है। विशेष-किसी सुंदर वस्तु को देखकर हमारे मन में जो आनन्ददायिनी अनुभूति होती है उसके स्वभाव और स्वरूप का विवेचन तथा जीवन की अन्यान्य अनुभूतियों के साथ उसका समन्वय स्थापित करना इनका मुख्य उद्देश्य होता है।
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
- भरत की सौन्दर्य दृष्टि ('नाट्य प्रसंग' नामक हिन्दी चिट्ठा)
- सौन्दर्यशास्त्र के तत्व (गूगल पुस्तक; लेखक - कुमार विमल)
- अथातो सौंदर्यजिज्ञासा (गूगल पुस्तक; लेखक - रमेश कुंतल मेघ)
- Revue online Appareil
- Postscript 1980- Some Old Problems in New Perspectives
- An Inquiry into the Aesthetic
- Aesthetics in Art Education: A Look Toward Implementation
- An history of aesthetics