सिनसिनवार

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सिनसिनवार जाटों का गोत्र है । इस गोत्र वाले जाटों का उद्गम भरतपुर जिले के सिनसिनी नामक गाँव से माना जाता है । भरतपुर के जाट राजा सूरजमल भी सिनसिनवार गोत्र के जाट थे । सिनसिनी गाँव का नाम सिनसिना देव के आधार पर रखा गया है. महाभारत शल्य पर्व में इसका उल्लेख है.

   अदितिर देव माता च हरीः शरीः सवाहा सरस्वती 
   उमा शची सिनीवाली तदा चानुमतिः कुहूः 
   राका च धिषणा चैव पत्न्यश चान्या दिवौकसाम (महाभारत:९.४४.१२) 

Border भरतपुर जाट राज्य का उदय

सिकन्दरा की लूट के बाद राजा राम ही सर्वखाप पंचायत के सर्वे-सर्वा बन गए. १४ जुलाई १६८८ को बीजल, अलवर, स्थान पर शेखावाटी राजपूतों और चौहान राजपूतों की लड़ाई में राजा राम शहीद हो गए. राजा राम की मृत्यु के बाद सर्वखाप पंचायत का सक्रीय मुख्यालय सिनसिनी गाँव बन गया. औरंगजेब ने राजपूतों को पक्ष में कर जाटों को दबाना शुरू किया. सन १६९४ में शाह आलमगीर ने राजा बिशन सिंह राजपूत और कल्याण सिंह भदौरिया को आगरा के जाटों को दबाने भेजा. २० फरवरी १६९५ में जाटों को घेरने की कोशिशे शुरू हुई और अप्रेल तक उनको दबाया न जा सका. अंत में एक रक्त रंजित युद्ध में राजपूत और मुगलिया सेना का सिनसिनी के आस-पास की जाट गढ़ियों पर तो कब्जा हो गया परन्तु जाट नेता नन्द राम अपने सभी पुत्रों सहित बच निकालने में सफल रहा. सिनसिनी हाथ से निकलने के बाद फिर गुप्त जगह पंचायत का आयोजन किया गया. भज्जा राम और उनके लघु भ्राता ब्रज राज अज्ञात वास से बहार निकल आये तथा पंचायत के फैसले के अनुसार ब्रज राज के पुत्र चुडा्मन को जाटों का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी. जाटों की पंचायती सेना ने गढ़ियों पर काबिज मुस्लिम और राजपूत फौजदारों को कत्ल कर दिया तथा जगह -जगह जाट चौकियां स्थापित करली. सन १६९६ में एक बार फिर शाही सेना से पंचायती सेना का मुकाबला हुआ. जाट अंतिम सांस तक लड़े. इस युद्ध में ब्रज राज काम आये और भाई के गम में भज्जा राम भी चल बसे.

ब्रज राज के बाद जाटों ने बन्दूक छोड़कर हल चलाना शुरू किया तथा धीरे-धीरे जाट संगठन सर्वखाप पंचायत को भी सुद्रढ़ किया. चुड़ामन ने सिनसिनी में जाट प्रमुखों की एक पंचायत बुलाई जो सर्वखाप पंचायत का ही लघु रूप था. चुड़ामन ने धीरे-धीरे ब्रज मंडल से मुग़ल शासन समाप्त कर दिया तथा जाटों की एक सुद्रढ़ सेना तैयार कर भरतपुर जाट राज्य की स्थापना की.