समवाक

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यह नक़्शा हिन्द-यूरोपी भाषा परिवार में 'केन्टम-सातेम समवाक' दर्शाता है - केसरी रंग का क्षेत्र हिन्द-यूरोपी भाषाएँ बोलता है और लाल रंग की समवाक सीमा उसे 'केन्टम' (पश्चिमी) और 'सातेम' (पूर्वी) हिस्सों में बांटती है

समवाक, समग्लोस या आइसोग्लोस (अंग्रेज़ी: isogloss) ऐसी भौगोलिक सीमा को कहते हैं जिसके पार भाषा का कोई पहलु बदल जाता हो, मसलन किसी स्वर वर्ण का उच्चारण, किसी व्यंजन वर्ण को उच्चारण करने का लहजा, इत्यादि।[1] अगर ऐसे समवाकों का समूह किसी एक ही रेखा पर पड़ता हो तो वह दो उपभाषाओं के बीच में सीमा होने का बड़ा संकेत होता है। उदाहरण के लिए एक अध्ययन में पाया गया की हिन्दी क्षेत्र के पूर्वी इलाक़ों में 'ण' का उच्चारण 'न' जैसा किया जाता है, जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में 'न' और 'ण' में अंतर किया जाता है। इन दोनों क्षेत्रों के गाँवों का अध्ययन करने पर बीच में एक सीमा बनती है जहाँ हिन्दी भाषा के इस पहलु का समवाक है।[2]

केन्टम-साटेम समवाक[संपादित करें]

हिन्द-यूरोपी भाषा परिवार में 'केन्टम-सातेम समवाक' (Centum-Satem Isogloss) मशहूर है। इस समवाक सरहद से पूर्वी हिन्द-यूरोपी भाषी इलाक़ों में (यानि संस्कृत, रूसी, फ़ारसी, हिन्दी में) बहुत से शब्दों में 'स' या 'श' की आवाज़ देखी जाती है जबकि इस से पश्चिम के क्षेत्रों में (यानि अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रांसिसी में) उन्ही के सजातीय शब्दों में 'क', 'ख' या 'ग' की ध्वनि आती है। उदाहरण:

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Glossary Of Hindi Urdu & English Linguistic Terminology, Umberto Nardella, Star Publications, 2008, ISBN 978-81-7650-329-7, ... samvak' -, isogloss ...
  2. Language in social groups, John Joseph Gumperz, Stanford University Press, 1971, ISBN 978-0-8047-0798-5, ... A preliminary survey of three village dialects in the Hindi area ... as one approaches an isogloss ... in the case of the retroflex and dental nasals /ṇ/ and /n/ ...