शिकोकू

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जापान का शिकोकू द्वीप (लाल रंग में)
"८८ मंदिरों की तीर्थयात्रा" के लिए शिकोकू आई एक श्रद्धालु लड़की
शिकोकू का नक़्शा (जिसमें ८८ मंदिरों के स्थल दिखाए गए हैं)

शिकोकू (जापानी: 四国, "चार प्रान्त") जापान के चारों मुख्य द्वीपों में से सब से छोटा और सब से कम आबादी वाला द्वीप है। यह २२५ किमी लम्बा है और इसकी चौड़ाई ५० और १५० किमी के बीच (जगह-जगह पर अलग) है। कुल मिलकर शिकोकू का क्षेत्रफल १८,८०० वर्ग किमी है और इसकी जनसँख्या सन् २००५ में ४१,४१,९५५ थी। यह होन्शू द्वीप के दक्षिण में और क्यूशू के पूर्व में स्थित है।

भूगोल[संपादित करें]

शिकोकू क्षेत्र में चार प्रांत आते हैं: एहिमे, कागावा, कोची और तोकुशिमा। १८,८०० वर्ग किमी के क्षेत्रफल के साथ शिकोकू विश्व का ५०वा सब से बड़ा द्वीप है। इसपर एक पर्वत शृंखला है जो पूर्व और पश्चिम चलती है और द्वीप को दो हिस्सों में बांटती है - एक छोटा सा उत्तरी भाग जो सेतो भीतरी सागर के छोर पर है और एक बड़ा दक्षिणी भाग जो प्रशांत महासागर से लगता है। शिकोकू के ज़्यादातर निवासी उत्तरी भाग में रहते हैं और (सिवाय एक के) द्वीप के सारे मुख्य शहर भी इसी उत्तरी भाग में हैं।

शिकोकू का सब से ऊंचा पहाड़ इशिज़ूची पहाड़ है जो १,९८२ मीटर (६,५०३ फ़ुट) ऊंचा है। इसी इशिज़ुची पहाड़ के पास से शिकोकू की सब से लम्बी नदी, योशिनो नदी, शुरू होती है और पूर्व की ओर चलती है। १९६ किमी का सफ़र तय करने के बाद यह तोकुशिमा के शहर के पास समुद्र में जा मिलती है।

इस उत्तरी इलाक़े में उद्योग काफ़ी विकसित है और एक ताम्बे की खान भी मौजूद है। इसके पूर्वी भाग में उपजाऊ मैदान हैं जहाँ चावल, गेहूं और जौ उगाया जाता है। पूरे उत्तरी इलाक़े में फल भी उगाये जाते हैं, जैसे की नींबू, संतरे, तेंदू (पर्सिम्मन), आड़ू और अंगूर। शिकोकू का दक्षिणी भाग पहाड़ी इलाक़ा है और यहाँ कम लोग रहते हैं। दक्षिणी हिस्से में सिर्फ एक छोटा मैदानी इलाक़ा है जहाँ कोची शहर बसा हुआ है। इस क्षेत्र में सर्दियों में ज़्यादा ठण्ड नहीं पड़ती इसलिए ग़ैर-मौसमी सब्ज़ियाँ उगाई जाती हैं। यहाँ के वनों को भी काग़ज़ बनाने के काम लाया जाता है।

जापान के चारों बड़े द्वीपों में से शिकोकू अकेला है जिसपर कोई ज्वालामुखी स्थित नहीं है।[1]

संस्कृति[संपादित करें]

शिकोकू अपने "८८ मंदिरों की तीर्थयात्रा" के लिए जापान-भर में मशहूर है, जो कूकाए (空海) नामक प्राचीन बौध संत के साथ सम्बंधित है। पुराने ज़माने में श्रद्धालु पैरों पर चलकर इन मंदिरों के दर्शन किया करते थे, लेकिन आजकल बसों में मंदिर-से-मंदिर जाते हैं। शिकोकू में यह तीर्थयात्री अपनी सफ़ेद जैकिटों से पहचाने जा सकते हैं, जिनपर जापानी में "दोग्यो निनिन" लिखा होता है (जिसका अर्थ है "दो लोग जो इकठ्ठे सफ़र कर रहे हों")।

तोकुशिमा प्रान्त में अगस्त के महीने में ओबोन (お盆) त्यौहार मनाया जाता है, जिसका मक़सद अपने पूर्वजों को स्मरण करना और श्रद्धांजलि देना है। इसका एक आयोजन "आवा ओदोरी" नाच है जिसमें सैंकड़ों श्रद्धालु नाचकर शहर की सड़कों पर चलते हैं। इस देखने जापान के अन्य ईलाक़ों और विदेश से हर वर्ष १३ लाख पर्यटक आते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]